कोच्चि, 10 जुलाई केरल उच्च न्यायालय ने राज्य के कोट्टायम जिले में कथित तौर पर मजदूर संघ के एक नेता द्वारा एक निजी बस के मालिक पर किये गये हालिया हमले को लेकर सोमवार को पुलिस से नाराजगी जताई।
उच्च न्यायालय ने बस मालिक की याचिका पर पुलिस को उनके स्वामित्व वाली बसों को सुरक्षा मुहैया करने का निर्देश दिया था। इससे पहले, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने बस के परिचालन को बाधित करते हुए आरोप लगाया था कि वह (बस के मालिक) अपने कर्मचारियों को न्यूनतम पारिश्रमिक का भुगतान नहीं कर रहे हैं।
उच्च न्यायालय के उक्त निर्देश के बाद बस मालिक ने बसों के आगे लगाये गये झंडे और बैनर हटाने का प्रयास किया और इसी दौरान उन पर हमला किया गया।
घटना के आलोक में उच्च न्यायालय ने स्वत: एक दीवानी अवमानना मामला शुरू किया और न्यायमूर्ति एन नागरेश ने कहा कि घटना अदालत को एक चुनौती है तथा इसके ‘‘आदेश की अवज्ञा’’ है।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘बस मालिक को थप्पड़ मारना अदालत की अवमानना है। लोगों को अब लगेगा कि उन्हें अदालतों से भी न्याय नहीं मिलेगा। वे राजनीतिक संगठनों के जरिये समस्याएं सुलझाने की कोशिश करेंगे।’’
अदालत ने पुलिस को मजूदर संघ सीटू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किये जाने के बाद उठाये गये कदमों के सिलसिले में एक रिपोर्ट देने को कहा।
सीटू, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की मजूदर संघ इकाई है।
न्यायमूर्ति नागरेश ने कहा कि यह दिलचस्प है कि छह पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद हमला नहीं रोका जा सका।
अदालत ने कहा, ‘‘आप (पुलिस) को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि लड़ाई-झगड़ा नहीं हो। पुलिस की ओर से जानबूझ कर लापरवाही की गई। क्या पुलिस के व्यवहार की जांच की गई?’’
अदालत ने मजदूर संघों की भी आलोचना करते हुए कहा कि बल प्रयोग करना और लोगों का भयादोहन करना उनकी आदत हो गई है।
पुलिस ने बस मालिक राज मोहन पर हमला करने को लेकर 25 जून को माकपा की जिला इकाई के नेता एवं स्थानीय पंचायत सदस्य अजय के. आर. को गिरफ्तार किया था।
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