कोट्टायम (केरल), 14 अक्टूबर अगले साल होने वाले केरल विधानसभा चुनाव से पहले, राज्य में सत्तारूढ़ एलडीएफ को बुधवार को उस समय एक अच्छी खबर मिली, जब जोस के. मणि के नेतृत्व वाले केरल कांग्रेस (एम) धड़े ने कांग्रेस नीत यूडीएफ से अपने दशकों पुराने संबंध तोड़ने और माकपा नीत एलडीएफ के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया।
पार्टी नेता जोस के मणि ने यह भी कहा कि वह यूडीएफ की मदद से जीती राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ देंगे।
जोस ने एक संवाददाता सम्मेलन में धड़े की राजनीतिक स्थिति की घोषणा करते हुए उम्मीद जताई कि एलडीएफ नेतृत्व सत्तारूढ़ मोर्चे में उनकी पार्टी के प्रवेश पर सकारात्मक फैसला करेगा।
केरल कांग्रेस (एम) के जाने माने नेता दिवंगत के एम मणि के बेटे जोस ने देश में धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करने में माकपा नीत मोर्चे के प्रयासों की प्रशंसा की।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में एलडीएफ सरकार कृषक समुदाय के कल्याण की दिशा में काम करने की इच्छुक है, जो उनकी पार्टी का मूल आधार है।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और एलडीएफ नेतृत्व ने मोर्चे के साथ सहयोग करने के जोस धड़े के फैसले का स्वागत किया।
विजयन ने एक बयान में कहा कि केसी(एम) ने यूडीएफ के साथ 38 साल पुराना नाता तोड़कर यह रुख अपनाया है कि एलडीएफ राजनीतिक रूप से सही संगठन है।
उन्होंने कहा कि एलडीएफ में पार्टी के प्रवेश संबंधी फैसला मोर्चे की बैठक में किया जाएगा।
इस बीच, यूडीएफ नेतृत्व ने जोस धड़े की निंदा करते हुए कहा कि उसने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाने वाले कांग्रेस नीत मोर्चे की ‘‘पीठ में छुरा घोंपा’’ है।
यूडीएफ समन्वयक एम एम हसन ने भी कहा कि जोस धड़े को कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चे के समर्थन से जीती गई कोट्टायम लोकसभा सीट समेत सभी संसदीय पदों को छोड़ देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यूडीएफ ने उनके दिवंगत पिता के मणि के साथ खड़े होने वाले सांसदों एवं नेताओं को शर्मसार किया।
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