ताजा खबरें | बजट में केरल और अल्पसंख्यकों की उपेक्षा की गयी : विपक्ष का आरोप

नयी दिल्ली, 11 फरवरी राज्यसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों के कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार ने अगले वित्त वर्ष के आम बजट में केरल की अनेदखी की है वहीं कुछ सदस्यों ने दावा किया कि अल्पसंख्यकों के कल्याण से जुड़े मदों में कम आवंटन किया गया है।

बजट 2025-26 पर उच्च सदन में हुई चर्चा में भाग लेते हुए समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने आरोप लगाया कि बजट में अल्पसंख्यकों की घोर उपेक्षा की गयी है। उन्होंने दावा किया कि अल्पसंख्यकों के कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को या तो बंद कर दिया गया है या उन्हें बंद कर दिया गया है।

विकास के लिए शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए खान ने कहा कि प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित अन्य छात्रवृत्तियों में लगातार कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि मदरसों और अल्पसंख्यकों से जुड़ी योजनाओं के लिए आवंटित राशि में भी कटौती की गयी है।

खान ने कहा कि बजट के प्रावधानों से स्पष्ट है कि इस सरकार की मंशा ‘सबका साथ सबका विकास’ नहीं है।

भाकपा सदस्य पीपी सुनीर ने आरोप लगाया कि बजट में केरल के साथ अनेखी की गयी है क्योंकि उस राज्य ने भाजपा की ‘विभाजनकारी’ नीति को बार-बार खारिज किया है।

सुनीर ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह केरल के विकास को बाधित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केरल के लोक कल्याणकारी मॉडल को रोकना चाहती है। उन्होंने केंद्र पर जीएसटी में भी केरल को उसका उचित हक नहीं देने का आरोप लगाया।

माकपा सदस्य एए रहीम ने भी आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार ने बार-बार बजट में केरल की अनदेखी की है। उन्होंने केरल में शिक्षा के उच्च स्तर का जिक्र करते हुए कहा कि ‘‘केरल जो आज सोचता है, देश बहुत बाद में वह सोचता है।’’

रहीम ने कहा कि आयकर में छूट को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कही जा रही हैं लेकिन अर्थव्यवस्था को असली फायदा आयकर में छूट दे कर नहीं बल्कि वेतन में वृद्धि करने से होगी।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जॉन ब्रिटास ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि मोदी सरकार के शासनकाल में भारतीय मुद्रा रूपया लगातार गिर रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के शासनकाल में रूपया अमेरिकी डॉलर की तुलना में 45 रूपये से बढ़कर 60 रूपये हुआ जबकि नरेन्द्र मोदी सरकार में यह 60 रूपये से बढ़कर 90 रूपये हो गया।

आईयूएमएल सदस्य हारिश बीरन ने भी बजट को केरल विरोधी बताया और कहा कि यह चुनाव जीतने के लिए पेश किया गया बजट है। उन्होंने बजट को ‘‘राजनीतिक औजार’’ बताया और कहा कि अगले साल केरल में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐेसे में उन्हें उम्मीद है कि अगले साल के बजट में केरल के लिए तमाम घोषणाएं की जाएं।

भाजपा के अजीत गोपछड़े ने विभिन्न हिंदी फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस प्रकार उन फिल्मों में पात्रों ने देश, समाज आदि के हित में तथा देशद्रोहियों के खिलाफ कदम उठाए, उसी प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के बाद विभिन्न कदम उठाए।

चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सदस्य रजनी पाटिल ने कहा कि बजट देश के सामने मौजूदा चुनौतियों को हल करने में नाकाम रही है और बेरोजगारी तथा कृषि संकट जैसे गंभीर मुद्दे के हल के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को कानूनी जामा पहनाने के लिए भी कदम नहीं उठाए गए हैं और न ही मनरेगा मद में आवंटन बढ़ाया गया है।

पाटिल ने जाति आधारित जनगणना कराए जाने की मांग करते हुए कहा कि इससे विभिन्न जातियों को उनकी संख्या के अनुसार हक मिल सकेगा।

महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने के लिए कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों के कदमों का जिक्र करते हुए पाटिल ने कहा कि इस सरकार ने नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित किया है लेकिन यह कब लागू होगा, इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है।

तेदेपा के साना सतीश बाबू ने कहा कि आंध्र प्रदेश में पुनर्निर्माण कराए जाने की जरूरत है और इसके लिए राज्य को केंद्र से लगातार मदद की दरकार है। उन्होंने राज्य में नए बंदरगाहों को विकसित किए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

चर्चा में भाग लेते हुए राकांपा (एसपी) सदस्य फौजिया खान ने बजट का सांप-सीढ़ी का खेल बताया। उन्होंने बेरोजगारी सहित विभिन्न मोर्चों पर सरकार के विफल रहने का दावा करते हुए कहा कि कई अहम मदों में कटौती की गयी है।

उन्होंने जल मिशन योजना का जिक्र करते हुए दावा किया कि सरकार इस मद में सिर्फ 41 प्रतिशत राशि ही खर्च कर सकी। इसका प्रतिवाद करते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि फौजिया खान द्वारा पेश आंकड़े सही नहीं हैं और वह अपने आंकड़े ठीक करें।

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