देश की खबरें | मणिपुर में बफर जोन कायम रखें, विधानसभा के साथ अलग केंद्र शासित प्रदेश गठित किया जाए: कुकी समूह

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नयी दिल्ली, 31 मई कुकी समूहों ने शनिवार को कहा कि विधानसभा के साथ अलग केंद्र शासित प्रदेश गठित किये जाने तक मणिपुर में बफर जोन को ‘‘सुरक्षात्मक उपाय’’ के रूप में बनाए रखा जाना चाहिए।

कुकी-जो वुमन फोरम की सह-संयोजक चोंग हाओकिप ने यहां संवाददाता सम्मेलन में मणिपुर के कुकी बहुल इलाकों को अलग कर विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग दोहराई।

हाओकिप ने कहा, ‘‘यह किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, यह कुकी लोगों की सुरक्षा और अस्तित्व के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय है।’’उन्होंने कहा कि इस मांग को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सुरक्षा और शांति के लिए आवश्यक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।

हाओकिप ने आरोप लगाया, ‘‘कुकी-जो समुदाय के सदस्यों को इंफाल से खदेड़ दिया गया, जानवरों की तरह मारा गया। हमारे साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार किया गया। हमें हमारी पहचान के कारण मारा गया और सुरक्षा बलों ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया। सरकार हमें बचा सकती थी, लेकिन उसने कुछ नहीं किया।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘इंफाल में वर्षों से रह रहे लोग बेघर हो गए हैं। कुकी-जो लोगों की आस्था हिल गई है। पुलिस होने के बावजूद, हमारे लोगों की हत्या की जा रही है।’’

कुकी छात्र संगठन की दिल्ली एवं एनसीआर इकाई के अंतरिम अध्यक्ष सी. थंगमिनलाल डोंगेल ने कहा कि हिंसा रोकने और व्यवस्था बहाल करने के लिए बफर जोन एक महत्वपूर्ण कदम था।

उन्होंने कहा, ‘‘जब तक कोई राजनीतिक समाधान नहीं निकल जाता, बफर जोन को बनाए रखना होगा। यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि अब तक शांति स्थापित नहीं हो पाई है।’’

कुकी प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि उनकी मांग संवैधानिक दायरे में है।

अधिवक्ता विश्वजीत सिंह ने कहा, ‘‘कई राज्यों का पुनर्गठन किया गया है, हाल ही में जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया। संविधान देश की अखंडता की बात करता है, किसी राज्य की नहीं।’’

हाओकिप ने कहा कि उन्हें ‘‘भेदभाव और हिंसा’’ का सामना करने के कारण अलग प्रशासनिक इकाई की मांग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

मई 2023 से मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहने वाले मेइती और पर्वतीय इलाकों में बहुसंख्यक कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में अबतक 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं।

एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद, केंद्र ने 13 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, लेकिन उसे निलंबित रखा गया है।

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