नयी दिल्ली, 17 मार्च उच्चतम न्यायालय ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करने से सोमवार को इनकार कर दिया जिसमें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा और संरक्षण से संबंधित मामले की सुनवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गयी थी।
न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र की घोषणा सहित उद्यान से संबंधित मुद्दे उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित हैं।
पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वह उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ले और शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित कार्यवाही में एक आवेदन दायर करें।
वकील ने शीर्ष अदालत में उचित याचिका दायर करने की स्वतंत्रता के साथ याचिका वापस ले ली।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में उद्यान से संबंधित कई मुद्दे उठाए गए हैं, जिसमें पारिस्थितिकी की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र की घोषणा भी शामिल है। पीठ ने कहा, "यह मुद्दा इस न्यायालय के समक्ष लंबित है।"
उच्च न्यायालय ने पिछले साल छह दिसंबर को पारित अपने आदेश में मामले को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया था (भविष्य की कोई तारीख तय किए बिना) और कहा था कि राष्ट्रीय उद्यान से संबंधित कई मुद्दे उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित हैं।
उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की जैव-विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण, पारिस्थितिकी-नाजुक क्षेत्र सहित नौ अधिसूचित पशु गलियारों के संरक्षण और कथित अनधिकृत औद्योगिक और अन्य गैर-वनीय गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई से संबंधित कई मुद्दे उठाए गए थे।
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