बेंगलुरु, 24 मई कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने राज्य में निवेश परिदृश्य के बारे में ‘झूठ फैलाने’ को लेकर शुक्रवार को भाजपा नेताओं की आलोचना की।
वह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र के इस आरोप पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे कि कर्नाटक 'सुस्त और सोई हुई कांग्रेस सरकार' का सीधा परिणाम भुगत रहा है।
विजयेंद्र का बयान इस खबर के आलोक में आया कि गूगल (कंपनी) पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में स्मार्ट फोन और ड्रोन का उत्पादन करेगी।
शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ भाजपा नेता कर्नाटक में निवेश के बारे में झूठी जानकारी ट्वीट कर रहे हैं। उन्हें झूठ फैलाने को लेकर शर्म आनी चाहिए। हम उन्हें चुनाव के बाद दस्तावेज के साथ सबूत देंगे।’’
जब उनसे यह कहा गया कि भाजपा के नेता कह रहे हैं कि कंपनियां कर्नाटक के बजाय पड़ोसी राज्यों में निवेश कर रही हैं, तब उन्होंने कहा कि उन्हें (भाजपा नेताओं को) तथ्यों की जांच कर लेनी चाहिए।
शिवकुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा के कुशासन के चलते लाखों उद्योगपति एवं व्यापारी देश से चले गये हैं।
शिवकुमार के मुताबिक कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद निवेशक एक बार फिर राज्य में रूचि दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे उद्योग मंत्री एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री शानदार काम कर रहे हैं। पूरा देश जानता है कि कर्नाटक समृद्धि, प्रगति और शांति की भूमि है। पूरी दुनिया बेंगलुरु और कर्नाटक की ओर निहार रही है।’’
विजयेंद्र ने ‘एक्स’ पर कहा था, ‘‘ गूगल (कंपनी) स्मार्ट फोन एवं ड्रोन के उत्पादन के लिए तमिलनाडु में अरबों का निवेश करने वाली है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ कर्नाटक एक सुस्त, सोई हुई कांग्रेस 'सरकार' का सीधा परिणाम भुगत रहा है । यह सरकार पूरी तरह से दिशाहीन हो गई है और अपने कुशासन और गलत प्राथमिकताओं के कारण राज्य को त्रासदी की ओर ले जा रही है।’’
विजयेंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार भारत में निवेश को आकर्षित करने में सफल रही है लेकिन कांग्रेस सरकार कर्नाटक को ‘शीर्ष निवेश स्थल’ के रूप में प्रदर्शित करने एवं निवेशकों में मन में विश्वास जगाने में बुरी तरह विफल हुई है।’’
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘ यह वही सरकार है जिसने अपने गठबंधन सहयोगी (तमिलनाडु में सत्तारूढ़) द्रमुक के फायदे के लिए कर्नाटक के किसानों को बर्बाद कर दिया तथा कावेरी नदी के पानी में अपने हिस्से का बचाव नहीं कर पायी। अब फिर कोई अचरज नहीं है कि तमिलनाडु में अरबों डॉलर के निवेश के जाने पर इसका वही रूख बना हुआ है।’’
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