देश की खबरें | कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शिवकुमार के मामले में सुनवाई 29 नवंबर तक स्थगित की
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बेंगलुरु, 22 नवंबर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति मामले में उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार की अपील पर सुनवाई 29 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
अपील में शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को दी गई जांच की मंजूरी को चुनौती दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस. वी. राजू और शिवकुमार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील उदय होल्ला द्वारा एक संयुक्त ज्ञापन दायर करने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी।
सीबीआई ने 15 नवंबर को उच्च न्यायालय के समक्ष उच्चतम न्यायालय के उस निर्देश का उल्लेख किया था जिसमें जांच एजेंसी द्वारा स्थगन को रद्द करने के आवेदन को दो सप्ताह के भीतर निपटाने को कहा गया था।
इसके बाद अदालत ने सुनवाई के लिए 22 नवंबर की तारीख तय की थी।
एएसजी ने बुधवार को अदालत को सूचित किया कि सीबीआई 27 नवंबर को अपनी दलीलें पेश करेगी। उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता के वकील को आज ही अपना मामला पेश करने की अनुमति दी जा सकती है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि 27 नवंबर को कोई सुनवाई नहीं होगी।
शिवकुमार के वकील होल्ला ने कहा कि उन्हें मामले पर बहस करने के लिए केवल 30 मिनट की जरूरत है और कहा कि उन्हें सुनवाई स्थगित करने पर कोई आपत्ति नहीं है।
उच्च न्यायालय ने दोनों वकीलों को स्थगन के लिए एक संयुक्त ज्ञापन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और फिर सुनवाई 29 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले एक पीठ ने शिवकुमार पर मुकदमे के लिए सरकार द्वारा 25 सितंबर, 2019 को दी गई मंजूरी को चुनौती देने संबंधी उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। तब शिवकुमार ने इसे खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी थी जिसने एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी।
सीबीआई ने स्थगन आदेश को रद्द करने की अर्जी दायर की थी।
शिवकुमार के आवास और कार्यालयों में 2017 में आयकर विभाग के तलाशी अभियान के आधार पर, प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ अपनी जांच शुरू की थी। ईडी की जांच के आधार पर सीबीआई ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी थी।
राज्य सरकार ने 25 सितंबर, 2019 को मंजूरी दे दी थी। सीबीआई ने उनके खिलाफ तीन अक्टूबर, 2020 को एक प्राथमिकी दर्ज की थी।
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