देश की खबरें | कर्नाटक : सिद्धरमैया के सामने मंत्रिमंडल गठन, चुनावी वादों को पूरा करने की चुनौती

बेगंलुरु, 18 मई कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनने जा रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया के सामने कई चुनौतियां रहेंगी, जिनमें मंत्रिमंडल गठन, विभागों का बंटवारा और पांच ‘गारंटी’ के वादे को पूरा करना प्रमुख हैं।

सिद्धरमैया को पार्टी सहयोगी और उपमुख्यमंत्री बनने जा रहे डी.के. शिवकुमार को भी साथ लेकर चलना होगा।

शपथ लेने के बाद सिद्धरमैया के सामने जो पहली चुनौती है, वह एक ऐसा मंत्रिमंडल गठित करना है, जिसमें सभी समुदायों, क्षेत्रों और गुटों के अलावा नए और पुरानी पीढ़ी के विधायकों को साधा जा सके।

कर्नाटक मंत्रिमंडल में अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं और ऐसे में कई विधायक मंत्री बनने के इच्छुक हैं, जिसके चलते सिद्धरमैया के हाथ में एक कठिन कार्य होगा।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, 10 मई को हुए विधानसभा चुनावों में सभी प्रमुख समुदायों ने बड़े पैमाने पर पार्टी का समर्थन किया है, ऐसे में स्वाभाविक रूप से हर एक की आकांक्षाएं होंगी और सिद्धरमैया को सभी को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी।

उपमुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार थे। हालांकि, कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि शिवकुमार ही उपमुख्यमंत्री होंगे। इससे पार्टी के कई वरिष्ठ नेता नाराज हैं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी परमेश्वर ने आज पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को आगाह किया कि यदि उपमुख्यमंत्री पद किसी दलित को नहीं दिया गया तो उसकी प्रतिकूल प्रतिक्रिया होगी और पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी होगी।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ मैं मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री दोनों ही पदों का आकांक्षी था लेकिन अब हमें आलाकमान के फैसले का पालन करना है, इसलिए यह देखना है कि वे आने वाले दिनों में क्या करेंगे। फिलहाल उन्होंने दो के लिए घोषणा की है और हमें यह देखना एवं इंतजार करना होगा कि वे कैसे मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान न्याय करेंगे।’’

लिंगायत के 39 विधायक, वोक्कालिगा के 21, अनुसूचित जाति के 22, अनुसूचित जनजाति के 15, मुस्लिम के नौ और कुरुबा के आठ विधायक समेत अन्य भी कर्नाटक मंत्रिमंडल में प्रमुख भूमिका की मांग कर रहे हैं।

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