ताजा खबरें | न्याय संहिता चर्चा तीन अंतिम लोस
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच और गृहमंत्री अमित शाह के परिश्रम से लाये गए तीनों विधेयक अमृतकाल का आधार बनेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी सोच और गृहमंत्री अमित शाह के परिश्रम से लाये गए तीनों विधेयक अमृतकाल का आधार बनेंगे।
सिंह ने भी कहा कि अपराध न्याय प्रणाली में आमूल-चूल सुधार की सिफारिश पहले कई बार की गई है, लेकिन इन पर कोई अमल नहीं हुआ।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा सौभाग्य है कि हम इसके साक्षी बन रहे हैं। ये कानून आने वाले सौ-डेढ़ सौ वर्षों तक न्याय देने का काम करेंगे। ये जनता के प्रति सरकार का सबसे बड़ा योगदान होगा।’’
सिंह ने कहा कि नए कानून में मिलावट के खिलाफ छह महीने की सजा का प्रावधान किया गया है, जो बहुत कम है और इसे कम से कम सात वर्ष किया जाना चाहिए।
भाजपा के ही पी. पी. चौधरी ने कहा कि आज आपराधिक न्याय व्यवस्था में बड़ा इतिहास बनने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले के कानून का उद्देश्य केवल दंड देना था, लेकिन अब उद्देश्य न्याय देने का है।
चौधरी ने कहा कि इन विधेयकों के लागू होने के बाद नए कानूनों के पूर्वगामी प्रभाव से लागू होने अथवा नहीं होने को लेकर लोगों में संशय है।
उन्होंने कहा कि वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि पुराने मामलों में नए कानून लागू नहीं होंगे और ये भविष्य में होने वाले अपराधों पर लागू होंगे।
भाजपा के दिलीप सैकिया ने कहा कि इन विधेयकों के लागू होने के बाद जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित होगा।
इसी पार्टी के गणेश सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से घोषित ‘पंच प्रण’ में ब्रिटिशकालीन प्रतीकों को समाप्त करने का देश से वादा किया था और इसी कड़ी में ये विधेयक बहुत अहम कदम हैं।
भाजपा सांसद राम कृपाल यादव ने कहा कि इन विधेयकों के पारित होने के बाद गरीब और वंचित तबकों को न्याय मिलेगा।
उन्होंने सरकार से मांग की कि वह इस बारे में कोई कदम उठाए कि गरीबों और वंचितों को पैसे के अभाव में न्याय से वंचित न रहना पड़े।
भाजपा की संगीता कुमारी सिंहदेव ने कहा कि इन कानूनों में महिलाओं से संबंधित प्रावधान स्वागत योग्य हैं।
चर्चा में भाजपा के जगदंबिका पाल, सत्तारूढ़ पार्टी की सुनीता दुग्गल, प्रताप चंद सारंगी, जसकौर मीणा और रीता बहुगुणा जोशी ने भी भाग लिया।
चर्चा अधूरी रही।
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