नयी दिल्ली, पांच अप्रैल उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पी एस नरसिम्हा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘कैम्पस लॉ सेंटर’ की संवैधानिक कानून व्याख्यान श्रृंखला ‘कर्तव्यम’ के उद्घाटन सम्मेलन को शुक्रवार को संबोधित किया। एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।
विज्ञप्ति में बताया गया कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश ने भारतीय परंपराओं, संवैधानिक मूल्यों और बी आर आंबेडकर जैसे महान विचारकों के ज्ञान पर आधारित अधिकारों और कर्तव्यों के एक दूसरे से जुड़े होने का जिक्र किया।
इसमें कहा गया, ‘‘न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने कर्तव्यम को एक साधना बताया। उन्होंने नागरिकों के अधिकारों एवं कर्तव्यों को सूर्य और सूर्य के प्रकाश से जोड़ा, जो अविभाज्य और जीवनदायी हैं।’’
इसमें कहा गया कि इस मौके पर अपने विचार रखते हुए अटॉर्नी जनरल एन वेंकटरमणी ने ‘‘कर्तव्य-उन्मुख लेंस’ से कानून की पुनर्कल्पना करने का आह्वान किया और एक क्रांतिकारी मानवीय कर्तव्य अधिनियम का सुझाव भी दिया।’’
विज्ञप्ति के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय ने संविधान के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में व्याख्यान श्रृंखला शुरू की है।
इसमें कहा गया है, ‘‘इस पहल का उद्देश्य कानूनी और सामाजिक विचारों को जिम्मेदारी के सिद्धांतों के साथ फिर से जोड़ना है। ये सिद्धांत भारतीय दार्शनिक और संवैधानिक लोकाचार में गहराई से निहित हैं।’’
विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘चार अप्रैल, 2025 से शुरू हुई व्याख्यान श्रृंखला जनवरी 2026 तक आयोजित की जाएगी जिसमें 30 से अधिक प्रतिष्ठित विद्वान, न्यायाधीश एवं अधिवक्ता भाग लेंगे। इस दौरान केंद्रीय एवं राज्य के विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) जैसे वैधानिक निकायों के साथ सहयोगी सत्र आयोजित किए जाएंगे।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY