देश की खबरें | जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर तहसील में धरना दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तराखंड के चमोली जिले के भूमि धंसाव ग्रस्त जोशीमठ के संबंध में अपनी 11-सूत्रीय मांगों को पूरा न किए जाने के विरोध में प्रभावितों ने सोमवार को जोशीमठ तहसील परिसर में धरना दिया।

गोपेश्वर, 21 अगस्त उत्तराखंड के चमोली जिले के भूमि धंसाव ग्रस्त जोशीमठ के संबंध में अपनी 11-सूत्रीय मांगों को पूरा न किए जाने के विरोध में प्रभावितों ने सोमवार को जोशीमठ तहसील परिसर में धरना दिया।

'जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति' के आहवान पर एकदिवसीय धरना देने के बाद प्रभावितों ने जोशीमठ की उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भी भेजा।

संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने कहा कि जोशीमठ भूधंसाव और उससे प्रभावित लोगों की समस्याओं के निराकरण के संबंध में मुख्यमंत्री के साथ आठ अप्रैल को जोशीमठ में हुई वार्ता में इन मांगों को पूरा करने का अश्वासन दिया गया था और इस आधार पर तब आंदोलन स्थगित कर दिया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि चार माह बीत जाने के बाद भी हमारी मांगे नहीं मानी गई हैं।

सती ने बताया कि मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में संपूर्ण जोशीमठ नगर को आपदा प्रभावित घोषित करने, प्रभावित लोगों के नुकसान की भरपाई करने, जोशीमठ भूधंसाव को लेकर देश के शीर्ष वैज्ञानिक संस्थानों की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने, भूधंसाव से बेघर हुए परिवारों का स्थायी पुनर्वास होने तक वैकल्पिक व्यवस्था को कम से कम एक साल तक रखे जाने, 2010 में एनटीपीसी के साथ हुए समझौते को लागू करने, तपोवन विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना एवं हेलंग मारवाड़ी बाई पास पर स्थायी रोक लगाने जैसी मांगें शामिल हैं ।

सती ने कहा कि लोगों ने जोशीमठ के स्थायित्व और नवनिर्माण की निगरानी के लिए सरकार से अलग से एक समिति के गठन का सुझाव भी दिया है जिसमें जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति को भी प्रतिनिधित्व देने की मांग की गयी है।

समिति के प्रवक्ता कमल रतूड़ी ने कहा कि धरने से पहले आपदा प्रभावितों ने वहां बैठक भी की तथा समस्याओं के निराकरण के लिए राज्य सरकार पर दबाव बनाने का निर्णय किया।

इस वर्ष की शुरूआत में जोशीमठ में भूधंसाव की समस्या आने के कारण नगर में 868 भवनों में दरारें आई थीं जिनमें से 181 भवनों को रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया गया था। असुरक्षित घोषित भवनों से अन्य स्थानों पर पहुंचाए गए करीब 60 परिवार आज भी अस्थाई शिविरों में रह रहे हैं।

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