देश की खबरें | झारखंड: मुख्यमंत्री सोरेन के पूर्व सहयोगी पर 1,000 करोड़ रुपये का अवैध खनन गिरोह चलाने का आरोप

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नयी दिल्ली, दो जुलाई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक पूर्व सहयोगी ने राज्य में अवैध खनन गिरोह संचालित करने के लिए ‘‘राजनीतिक प्रभाव’’ का इस्तेमाल किया, जिससे 1,000 करोड़ रुपये की आय अपराध से अर्जित की गई।

संघीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि उसने रांची में एक विशेष धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) अदालत के समक्ष 30 जून को इस मामले में दायर एक नयी अभियोजन शिकायत (आरोप पत्र) में ये आरोप लगाए हैं।

ईडी ने दावा किया, ‘‘मौजूदा शिकायत आठ अतिरिक्त व्यक्तियों और दो कंपनियों की भूमिका को उजागर करती है, जो झारखंड के मुख्यमंत्री के तत्कालीन राजनीतिक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा द्वारा संचालित आपराधिक नेटवर्क का अभिन्न हिस्सा पाये गए हैं।’’

मिश्रा को जुलाई 2022 में ईडी ने उसके और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया था। वह साहिबगंज जिले के बरहेट विधानसभा क्षेत्र में सोरेन का राजनीतिक प्रतिनिधि था।

हालांकि, सोरेन ने हमेशा कहा है कि कोई गलत काम नहीं किया गया है।

इस छठे आरोप पत्र में नये आरोपियों में राजेश यादव उर्फ ​​दाहू यादव नाम के व्यक्ति को नामजद किया गया है।

ईडी के अनुसार, यादव फरार है और उसकी पहचान एक ‘‘मुख्य गुर्गे’’ के रूप में हुई है, जिसने पत्थरों के अवैध परिवहन की व्यवस्था की और खनिजों की बड़े पैमाने पर तस्करी के लिए फर्जी नौका निविदा को वित्तपोषित किया।

एजेंसी ने कहा कि आरोपपत्र में शामिल एक अन्य आरोपी हीरा लाल भगत मिर्जा चौकी क्षेत्र से अपनी कंपनी जय मां भवानी स्टोन वर्क्स का इस्तेमाल अवैध खनन कार्य के लिए करता था और उसके पास 3.13 करोड़ रुपये से अधिक की बेहिसाब नकदी पाई गई, जो सीधे तौर पर अपराध की आय को दर्शाती है।

आरोप पत्र में कहा गया है कि मिश्रा ने राजनीतिक प्रभाव का लाभ उठाकर साहिबगंज में अवैध खनन, जबरन वसूली और खनिज परिवहन पर एकाधिकार करने वाला एक व्यापक गिरोह संचालित किया, जिससे अपराध से अनुमानित 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित हुई।

ईडी ने बयान में कहा कि उसकी जांच में यह भी ‘‘उजागर’’ हुआ कि निमय चंद्रशील नामक व्यक्ति ने गिरोह के सरगना मिश्रा के साथ ‘‘षड्यंत्र’’ रचा तथा अपनी पत्नी के साथ मिलकर 50 प्रतिशत लाभ हिस्सेदारी के बदले में ‘‘धोखाधड़ी’’ से खनन पट्टा हासिल किया।

आरोप पत्र में कहा गया है कि मरीन इंफ्रालिंक लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी और उसके निदेशक यश जालान ने गिरोह के अवैध पत्थर परिवहन परिचालन को आसान बनाने के लिए ‘‘जानबूझकर’’ एम वी इंफ्रालिंक-3 नामक एक जहाज उपलब्ध कराया और 2.75 करोड़ रुपये का भुगतान ‘‘प्राप्त’’ किया, जो गिरोह की अवैध खनन आय से प्राप्त हुआ था।

ईडी ने दावा किया कि उसके नये आरोप पत्र ने ‘‘यह प्रदर्शित कर उसके मामले को और मजबूत कर दिया है कि किस प्रकार विभिन्न संचालकों ने - चाहे नौका सेवाओं के वित्तपोषण, अवैध खनन स्थलों के प्रबंधन, या कॉर्पोरेट के माध्यम से आय को वैध बनाने में सामूहिक रूप से गिरोह के आपराधिक कृत्यों को जारी रखा।’’

एजेंसी ने इस मामले में अब तक 18 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है।

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