देश की खबरें | झारखंड के मुख्यमंत्री ने वन अधिकार पट्टा के वितरण में तेजी लाने के लिये अभियान किया शुरू
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रांची, छह नवंबर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की हर पंचायत में आदिवासियों एवं अन्य पारंपरिक वनवासियों बीच के वन अधिकार पट्टा के वितरण में तेजी लाने के लिये सोमवार को एक अभियान शुरू किया।
‘अबुआ बीर दिशोम’ के तहत सरकार ने 10,000 गांवों को सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआर) पट्टा एवं करीब एक लाख परिवारों को व्यक्तिगत वन अधिकार (आईएफआर) पट्टा प्रदान करने तथा 20,679 लंबित दावों का निस्तारण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
एक अधिकारी ने बताया कि वन अधिकार कानून, 2006 का क्रियान्वयन 2008 में ही शुरू हुआ था, लेकिन राज्य में अबतक आईएफआर के तहत 60000 और सीएफआर के तहत 2000 पट्टों का ही वितरण किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान में करीब 15 लाख आदिवासियों तथा वनों में पारंपरिक रूप से रहने वाले अन्य परिवारों को शामिल किया जाएगा, जिससे पलायन, मानव तस्करी, बेरोजगारी तथा अन्य सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी।
इस कानून में वनों में रह रहे आदिवासियों एवं अन्य लोगों के वन संसाधानों पर अधिकार को मान्यता दी गयी है। ये लोग आजीविका, निवास एवं अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक उद्देश्यों समेत अपनी विविध जरूरतों के लिए इन वन संसाधनों पर आश्रित हैं।
सोरेन ने कहा ,‘‘ मैं महसूस करता हूं कि झारखंड बनने के बाद सबसे पहला काम जो किया जाना चाहिए था, वह अब किया जा रहा है। यहां बड़ी आबादी वनों एवं खेती से जुड़ी है। वन अधिकार कानून बने वर्षों हो गये, लेकिन इस विषय पर पहले कभी विशेष ध्यान नहीं दिया गया। शायद, यही वजह है कि वन अधिकारों के वास्ते पट्टा देने का यह अभियान शुरू किया जा रहा है।’’
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