देश की खबरें | आय से अधिक संपत्ति मामले में जब्त संपत्ति लौटाने की जयललिता के उत्तराधिकारी की याचिका खारिज की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा उनके खिलाफ एक मामले में जब्त की गई संपत्तियों को वापस करने के अनुरोध वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी और कहा कि कार्यवाही समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि वह अपराध से बरी हो गयी हैं।
नयी दिल्ली, 14 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा उनके खिलाफ एक मामले में जब्त की गई संपत्तियों को वापस करने के अनुरोध वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी और कहा कि कार्यवाही समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि वह अपराध से बरी हो गयी हैं।
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कर्नाटक राज्य बनाम जे जयललिता मामले में 2017 के फैसले में की गई अपनी टिप्पणियों का उल्लेख किया, जिसमें कार्यवाही रोक दी गई थी क्योंकि अपील लंबित रहने के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।
पीठ ने कहा, ‘‘इसका तात्पर्य यह होना चाहिए कि आरोपी संख्या एक (जयललिता) को बरी करने वाले उच्च न्यायालय के फैसले के संबंध में मामले पर आगे विचार इस अदालत द्वारा नहीं किया जाएगा। हालांकि, छूट का अर्थ यह नहीं होगा कि उच्च न्यायालय का फैसला अंतिम हो गया है।
शीर्ष अदालत जयललिता की भतीजी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आय से अधिक संपत्ति मामले में उनकी जब्त संपत्ति पर अधिकार का दावा किया गया था, जिसमें उन्हें शीर्ष अदालत द्वारा दोषी ठहराया गया था।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने 29 जनवरी को जयललिता की सभी जब्त संपत्तियों को तमिलनाडु सरकार को स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। यह निर्णय 13 जनवरी को कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा जयललिता की भतीजी और भतीजे जे दीपा और जे दीपक की याचिका को खारिज करने के बाद आया, जिन्होंने उनके कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में संपत्तियों पर दावा किया था।
जयललिता को अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने का दोषी पाया गया था। शीर्ष अदालत ने 2016 में जयललिता के निधन के बाद उनके खिलाफ कार्यवाही बंद करने के बावजूद उनकी संपत्तियों को जब्त करने के फैसले को बरकरार रखा।
उनके उत्तराधिकारियों ने तर्क दिया कि चूंकि जयललिता के खिलाफ मामला समाप्त हो चुका है, इसलिए उनकी संपत्ति जब्त नहीं की जानी चाहिए। हालांकि, उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि उच्चतम न्यायालय ने अन्य आरोपियों की विशेष अदालत द्वारा दी गई सजा को बरकरार रखा है, और इस प्रकार, संपत्ति जब्ती वैध बनी हुई है।
तमिलनाडु सरकार के पास मौजूद संपत्तियों में चेन्नई के पोएस गार्डन में जयललिता का आवास ‘वेद निलयम’, आय से अधिक संपत्ति मामले से जुड़ी कई भूखंड और संपदाएं, उनके नाम पर बैंक जमा राशि और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियां, सोने के आभूषण और बहुमूल्य वस्तुएं शामिल हैं, जो उन्होंने 1 जुलाई 1991 से 30 अप्रैल 1996 तक की जांच अवधि के दौरान एकत्र की थीं।
उच्च न्यायालय ने उत्तराधिकारियों को यह अनुमति दी थी कि यदि कोई संपत्ति जांच अवधि से पहले खरीदी गई हो तो वे उसका प्रमाण प्रस्तुत कर सकते हैं।
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