विदेश की खबरें | जापान की अदालत ने ‘यूनिफिकेशन चर्च’ भंग करने का आदेश दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. ‘तोक्यो जिला अदालत’ द्वारा ‘यूनिफिकेशन चर्च’ के कानूनी दर्जे को रद्द किए जाने का मतलब है कि वह कर से छूट का अपना विशेषाधिकार खो देगा और उसे अपनी संपत्तियां बेचनी होगी। हालांकि ‘यूनिफिकेशन चर्च’ इस निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालयों में अपील कर सकता है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

‘तोक्यो जिला अदालत’ द्वारा ‘यूनिफिकेशन चर्च’ के कानूनी दर्जे को रद्द किए जाने का मतलब है कि वह कर से छूट का अपना विशेषाधिकार खो देगा और उसे अपनी संपत्तियां बेचनी होगी। हालांकि ‘यूनिफिकेशन चर्च’ इस निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालयों में अपील कर सकता है।

यह आदेश दक्षिण कोरिया स्थित इस प्रभावशाली संप्रदाय को भंग करने के जापान के शिक्षा मंत्रालय के अनुरोध के बाद दिया गया है। मंत्रालय ने यह अनुरोध करते समय संप्रदाय द्वारा हेरफेर करके धन एकत्र किए जाने और भर्ती रणनीतियां अपनाए जाने का हवाला दिया था। इन रणनीतियों से इसके अनुयायियों में भय पैदा हुआ और उनके परिवारों को नुकसान पहुंचा।

‘यूनिफिकेशन चर्च’ की जापानी शाखा ने इस अनुरोध की आलोचना करते हुए इसे अपने अनुयायियों की धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताया था।

आबे की 2022 में हुई हत्या की जांच के दौरान ‘यूनिफिकेशन चर्च’ और जापान की सत्तारूढ़ ‘लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी’ के बीच दशकों पुराने मधुर संबंधों का पता चला है।

आबे के दादा और पूर्व प्रधानमंत्री नोबुसुके किशी द्वारा समर्थित कम्युनिस्ट-विरोधी आंदोलन के बीच ‘यूनिफिकेशन चर्च’ को 1968 में जापान में धार्मिक संगठन के रूप में कानूनी दर्जा प्राप्त हुआ था।

आबे की हत्या के आरोपी ने गिरजाघर के प्रति नाराजगी जताई थी और अपने परिवार की वित्तीय परेशानियों के लिए इसे जिम्मेदार ठहराया था।

यह गिरजाघर खुद को आधिकारिक तौर पर ‘फैमिली फेडरेशन फॉर वर्ल्ड पीस एंड यूनिफिकेशन’ कहता है। यह जापान की नागरिक संहिता के तहत निरसन आदेश का सामना करने वाला पहला धार्मिक समूह है।

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