देश की खबरें | जल्लीकट्टू: तमिलनाडु ने कहा, यह गलत धारणा कि खेल या मनोरंजन का सांस्कृतिक मूल्य नहीं हो सकता
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नयी दिल्ली, छह दिसंबर तमिलनाडु सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में राज्य में सांडों को काबू में करने वाले खेल ‘जल्लीकट्टू’ की अनुमति देने वाले कानून का बचाव करते हुए कहा कि यह एक ‘गलत धारणा’ है कि खेल या मनोरंजन का सांस्कृतिक मूल्य नहीं हो सकता।
‘जल्लीकट्टू’ को ‘एरुथाझुवुथल’ के रूप में भी जाना जाता है। इसका आयोजन तमिलनाडु में पोंगल फसल उत्सव के उपलक्ष्य में किया जाता है।
तमिलनाडु सरकार ने पिछले महीने शीर्ष अदालत में दायर अपनी लिखित दलीलों में कहा है कि 'जल्लीकट्टू' एक धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार है, जिसका राज्य के लोगों के लिए 'धार्मिक महत्व' है और यह पशु क्रूरता रोकथाम (पीसीए) अधिनियम, 1960 के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करता।
मंगलवार को दलीलों के दौरान, न्यायमूर्ति के एम जोसेफ के नेतृत्व वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ को तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि एक खेल आयोजन एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो सकता है और ‘जल्लीकट्टू’ में सांडों पर कोई क्रूरता नहीं की जाती।
द्विवेदी ने कहा कि यह एक ‘गलत धारणा’ है कि खेल या मनोरंजन का सांस्कृतिक मूल्य नहीं हो सकता।
शीर्ष अदालत ‘जल्लीकट्टू’ और बैलगाड़ी दौड़ की अनुमति देने वाले तमिलनाडु और महाराष्ट्र के कानूनों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
मंगलवार को दिन भर चली सुनवाई के दौरान, केंद्र और महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि वह महाराष्ट्र और तमिलनाडु के कानूनों का "पूरा समर्थन" करते हैं।
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(The above story first appeared on LatestLY on Dec 06, 2022 09:34 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

