देश की खबरें | कृष्णा नदी के पानी के मुद्दे पर जगन मोहन रेड्डी ने राजनीति नहीं करने को कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कृष्णा नदी जल के मुद्दे पर तेलंगाना द्वारा आंध्र प्रदेश की आलोचना करने के बीच आंध्र के मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने बृहस्पतिवार को पानी पर राजनीति करने की निंदा की और कहा कि वह केवल पड़ोसी राज्यों के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

अनंतपुरामु (आंध्र प्रदेश), आठ जुलाई कृष्णा नदी जल के मुद्दे पर तेलंगाना द्वारा आंध्र प्रदेश की आलोचना करने के बीच आंध्र के मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी ने बृहस्पतिवार को पानी पर राजनीति करने की निंदा की और कहा कि वह केवल पड़ोसी राज्यों के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके अलावा रेड्डी ने तेलंगाना सरकार के मंत्रियों और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के विधायकों द्वारा आंध्र प्रदेश के विरुद्ध दिए गए बयानों की भर्त्सना की। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं तेलंगाना की राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करता। न ही मैंने कर्नाटक और तमिलनाडु की राजनीति में दखलअंदाजी की है। जगन ऐसा भविष्य में भी नहीं करेगा। हम राज्यों के बीच अच्छे सम्बन्ध चाहते हैं और इसके जरिये समस्याओं को सुलझाना चाहते हैं।”

यह पहली बार है जब जगन ने आंध्र और तेलंगाना के बीच तनाव पर सार्वजनिक रूप से बयान दिया है। इससे पहले उन्होंने तेलंगाना में कृष्णा नदी पर अवैध परियोजनाओं में हस्तक्षेप करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को पत्र लिखा था।

मुख्यमंत्री ने बृहस्पतिवार को अपने पिता वाई एस राजशेखर रेड्डी की जयंती के अवसर पर अनंतपुरमु जिले के रायदुर्गम में किसान दिवस समारोह में भाग लिया जहां उन्होंने कृष क्षेत्र में कई नयी परियोजनाओं की शुरुआत की।

चंद्रबाबू नायडू की ओर परोक्ष रूप से इशारा करते हुए जगन ने कहा, “जब केसीआर (के. चंद्रशेखर राव) पलामुरु-रंगा रेड्डी, डिंडी और अन्य परियोजनाओं का निर्माण कर रहे थे तब मुख्यमंत्री के रूप में आप क्या कर रहे थे?”

जगन ने जोर देकर कहा कि आंध्र प्रदेश, प्रस्तावित रायलसीमा लिफ्ट सिंचाई योजना के जरिये केवल कृष्णा नदी के अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल करना चाहता है।

उन्होंने कहा, “यह परियोजना किसी और का पानी लेने के लिए नहीं है। एक किसान एक किसान ही होता है, यहां हो या वहाँ हो और पानी सबके लिए मूल्यवान है। उन्हें भी जीना है और हमें भी जीना है। हमें एक होकर सभी किसानों के लिए जल की आपूर्ति (सिंचाई के लिए) सुनिश्चित करनी चाहिए और पीने के लिए भी।”

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