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विदेश की खबरें | जाधव मामला: पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने अध्यादेश को लेकर सदन से बहिर्गमन किया

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विदेश की खबरें | जाधव मामला: पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने अध्यादेश को लेकर सदन से बहिर्गमन किया

इस्लामाबाद, 23 जुलाई पाकिस्तान के जेल में बंद चल रहे कुलभूषण जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले के मद्देनजर सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश के खिलाफ देश की विपक्षी पार्टियों ने संसद से बहिर्गमन किया।

सरकार की ओर से ‘अंतरराष्ट्रीय न्यायायलय समीक्षा एवं पुनर्विचार अध्यादेश 2020’ पेश किए जाने के बाद हंगामा शुरू हो गया। इसके तहत किसी सैन्य अदालत के फैसले की समीक्षा के लिये अध्यादेश लागू होने के 60 दिनों के अंदर इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में अर्जी दी जा सकती है।

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भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव (50) को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जासूसी एवं आतंकवाद के आरोप में अप्रैल 2017 में फांसी की सजा सुनाई थी। भारत ने जाधव को राजनयिक संपर्क मुहैया कराने की इजाजत देने से पाकिस्तान के इनकार करने पर हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) का रुख किया था और उनकी मौत की सजा को चुनौती दी थी।

आईसीजे ने जुलाई 2019 में कहा था कि पाकिस्तान को जाधव की दोषसिद्धि एवं सजा की अवश्य ही प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार करना चाहिए तथा बगैर विलंब किये भारत को उन्हें राजनयिक मदद उपलब्ध कराने दिया जाए।

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यह अध्यादेश 20 मई को जारी किया गया था।

चर्चा के दौरान बृहस्पतिवार को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के नेता ख्वाजा आसिफ ने कहा कि इमरान खान की सरकार जाधव को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश विपक्ष को स्वीकार नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘ कौन पाकिस्तान के सम्मान के साथ अब खेल रहा है…कौन आज भारत के सामने दंडवत है?’’

पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि यह अध्यादेश भारतीय कैदी को मौत की सजा से बचाने के लिए लाया गया है।

भाषण के बाद वह अन्य पार्टियों के नेता के साथ सदन से बाहर निकल गए।

इस घटनाक्रम के बीच भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि पाकिस्तान ने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को कानूनी राहत पाने के लिये उपलब्ध सारे रास्ते बंद कर एक बार फिर से अपना कपटतापूर्ण रुख प्रदर्शित किया है। साथ ही उसका यह कदम अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के निर्णय के खिलाफ भी है तथा नयी दिल्ली इस मामले में आगे के विकल्पों की तलाश करेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारत ने अदालत में एक पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिये इस्लामाबाद की सलाह पर एक पाकिस्तानी वकील को नियुक्त किया। लेकिन ‘पावर ऑफ अटॉर्नी ’ और जाधव के मामले से जुड़े सहायक दस्तावेजों के अभाव में पुनर्विचार याचिका दायर नहीं की जा सकी।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इस मामले में भारत के पास उपलब्ध सभी रास्ते बंद कर दिये हैं।

श्रीवास्तव ने इस बात का जिक्र किया कि नयी दिल्ली ने पिछले एक साल में जाधव से राजनयिक संपर्क कराने का 12 बार अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘बार-बार के अनुरोध के बावजूद मामले से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने देने की पूरी कवायद, निर्बाध राजनयिक संपर्क मुहैया नहीं कराने देने और पाकिस्तान द्वारा कुछ कथित एकतरफा कार्रवाई करते हुए एक बार फिर से उच्च न्यायालय का रुख करना पाकिस्तान के कपटपूर्ण रवैया को बेनकाब करता है।’’

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘पाकिस्तान न सिर्फ आईसीजे के निर्णय का, बल्कि अपने खुद के अध्यादेश का भी उल्लंघन कर रहा है। ’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 24, 2020 12:29 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).