(उज्मी अतहर)
नयी दिल्ली, 15 जून पूर्वी दिल्ली के न्यू सीलमपुर की घुमावदार, भीड़भाड़ वाली गलियों में कभी काफी चहल-पहल हुआ करती थी, लेकिन अब यहां खामोशी पसरी है।
यहां हर घर कबाड़ के कारोबार में लगा हुआ है। पुराने कंप्यूटर, फोन, फ्रिज और उनके अंदरूनी हिस्सों को तोड़कर अलग करके यहां बेचा जाता है।
हालांकि इस काम में अब पहले जैसी बात नहीं है।
भारत में ‘ई-वेस्ट’ यानी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कबाड़ के लिए एक नीति तैयार की जा रही है, ऐसे में प्रवर्तन एजेंसियों की सक्रियता बढ़ रही है। इस सक्रियता के चलते सीलमपुर समेत इस तरह के कबाड़ के लिए पहचाने जाने वाले इलाकों में कारोबार मंदा पड़ता जा रहा है।
यह कारोबार सीलमपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि लोनी, मुरादाबाद, मेरठ और छोटे शहरों में फैला हुआ है।
पर्यावरण से जुड़ी एक गैर सरकारी संस्था ‘टॉक्सिक्स लिंक’ के अधिकारी विनोद ने कहा, ‘‘वास्तव में कारोबार में कमी नहीं आई है। यह कारोबार अभी भी चल रहा है, लेकिन दिल्ली में अब यह उतना दिखाई नहीं देता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘दो चीजें हो रही हैं - बाजार बाहर जा रहा है, और इस कारोबार को कुछ हद तक संगठित तरीके से किया जा रहा है, लेकिन अनौपचारिक तरीका अभी भी हावी है।’’
हाल ही में न्यू सीलमपुर झुग्गी बस्ती के दौरे के दौरान ‘पीटीआई-’ की संवाददाता ने देखा कि कभी चहल-पहल वाले इस कबाड़ बाजार में अब खामोशी पसरी है।
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