देश की खबरें | आईडब्ल्यूएफ ने राजनयिक मिशन को निशाना बनाने के ‘भारत विरोधी ताकतों’ के प्रयासों की निंदा की

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नयी दिल्ली, चार जुलाई इंडियन वर्ल्ड फोरम (आईडब्ल्यूएफ) ने मंगलवार को कहा कि वह खालिस्तानी कार्यकर्ताओं सहित ‘‘भारत विरोधी ताकतों’’ द्वारा विदेश में भारतीय राजनयिक मिशन और उसके प्रवासी समुदाय को निशाना बनाने के प्रयासों की निंदा करता है।

खालिस्तान समर्थकों ने सैन फ्रांसिस्को में भारत के वाणिज्य दूतावास पर हमला किया, जहां उन्होंने आगजनी की कोशिश की। यह कुछ महीनों के भीतर सैन फ्रांसिस्को में राजनयिक मिशन पर हमले की दूसरी घटना है। अमेरिकी सरकार ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘‘आपराधिक कृत्य’’ करार दिया।

खालिस्तान समर्थकों ने दो जुलाई का एक वीडियो ट्विटर पर साझा किया, जिसमें सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास में आगजनी की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है।

आईडब्ल्यूएफ ने एक बयान में कहा कि कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका में भारतीय राजनयिकों को ‘‘खालिस्तानी कट्टरपंथियों’’ से खतरा है। बयान में कहा गया, आईडब्ल्यूएफ इन देशों में ‘‘खालिस्तानी कार्यकर्ताओं सहित भारत विरोधी ताकतों द्वारा विदेशी एजेंसियों की मिलीभगत से’’ भारतीय राजनयिक मिशन को निशाना बनाने के प्रयासों की कड़ी निंदा करता है।

फोरम ने कहा कि भारतीय प्रवासी हमेशा कानून का पालन करते रहे हैं और जिस देश में वे बसे हैं, वहां के आर्थिक विकास में योगदान दिया है।

आईडब्ल्यूएफ ने कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका की सरकारों से ‘‘खालिस्तानियों सहित ऐसे नापाक तत्वों के खिलाफ गंभीरता से कार्रवाई करने’’ और वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

बयान में आईडब्ल्यूएफ के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक के हवाले से कहा गया, ‘‘इसके साथ ही मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार से विदेश में खालिस्तानी आतंकवादियों सहित सभी भारत विरोधी तत्वों के तत्काल प्रत्यर्पण की मांग करने का भी आग्रह करता हूं।’’

कनाडा ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे पोस्टर में भारतीय अधिकारियों का नाम होने के संबंध में भारत को उसके राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त किया है और खालिस्तान की एक रैली से पहले प्रसारित हो रही ‘‘प्रचारात्मक सामग्री’’ को ‘‘अस्वीकार्य’’ बताया है।

कनाडा की विदेश मंत्री मिलानी जॉली का यह बयान तब आया है जब एक दिन पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत ने कनाडा, ब्रिटेन तथा अमेरिका जैसे अपने साझेदार देशों को ‘‘चरमपंथी खालिस्तानी विचारधारा’’ को तवज्जो न देने के लिए कहा है क्योंकि यह उनके रिश्तों के लिए ‘‘सही नहीं’’ है।

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