देश की खबरें | भाजपा के साथ गठबंधन के बारे में कुछ भी कहना ‘जल्दबाजी’ होगी: कुमारस्वामी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच डी कुमारस्वामी ने सोमवार को कहा कि अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच गठबंधन की बात करना ‘जल्दबाजी’ है।

बेंगलुरु, 17 जुलाई जनता दल (सेक्युलर) के नेता एच डी कुमारस्वामी ने सोमवार को कहा कि अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच गठबंधन की बात करना ‘जल्दबाजी’ है।

कुमारस्वामी ने यहां विपक्षी दलों की बैठक को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह इसे एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर दिखाने की कोशिश कर रही है, जबकि कर्नाटक में उसकी सरकार को किसानों के आत्महत्या करने की घटनाओं की कोई चिंता नहीं है।

संसदीय चुनावों के लिए जद (एस) के भाजपा के साथ हाथ मिला सकने की खबरों को लेकर कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘(लोकसभा) चुनावों में अभी आठ-नौ महीने हैं। देखते हैं।’’ उन्होंने कहा कि इस बारे में कुछ भी कहना ‘जल्दबाजी’ होगी।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कांग्रेस का जिक्र किए बिना कहा कि विपक्ष की बैठक को लेकर यहां सड़कों पर बैनर लगाए गए हैं और वे यह दिखाना चाहते हैं, जैसे कि उन्होंने कोई ऐसी बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है, जो पहले कोई नहीं कर पाया।

मई में हुए 224 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में, कांग्रेस ने 135 सीटें जीती थीं, वहीं भाजपा ने 66 और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा के नेतृत्व वाली जद (एस) ने 19 सीटें जीतीं थीं।

कुमारस्वामी ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक में 42 किसानों ने आत्महत्या की है और राज्य की कांग्रेस सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों से ऐसा कदम न उठाने की अपील भी नहीं की है।

कुमारस्वामी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘महागठबंधन और अन्य कार्यक्रम मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। कर्नाटक में पिछले दो महीनों से नयी सरकार आने के बाद से 42 किसानों ने आत्महत्या की है।"

जद (एस) में वरीयता क्रम में दूसरे नंबर के नेता कुमारस्वामी ने कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि उसे किसानों की आत्महत्या की कोई परवाह नहीं है। उन्होंने कहा, हाल में पेश किए गए कांग्रेस सरकार के बजट में, पांच 'गारंटी' (चुनावी वादों) को लागू करने के बहाने, कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज कर दिया गया है।

कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार ने किसानों के बीच विश्वास उत्पन्न करने के लिए अब तक कोई "संदेश" नहीं दिया है। उन्होंने आरोप लगाया, "मैं इसे एक निष्फल सरकार कहूंगा क्योंकि इसमें शुरू से ही कोई वित्तीय अनुशासन नहीं है। वे लोगों पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। वे पांच गारंटी के नाम पर लूट में लगे हुए हैं।"

बेंगलुरु में 'महागठबंधन' की बैठक पर कटाक्ष करते हुए कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘भारत के महान नेताओं को आमंत्रित करने और हवाई अड्डे से ताज वेस्टएंड होटल तक उनके बड़े पोस्टर लगाने के बाद यहां भव्य समारोह हो रहा है। क्या जश्न किसानों के शवों पर हो रहा है? इस सरकार को शर्म आनी चाहिए।"

कुछ हलकों में चल रही इन अटकलों पर कि कुमारस्वामी को भाजपा द्वारा कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया जा सकता है, उन्होंने कहा कि उन्हें इस विषय पर कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया में हो रही चर्चाओं से ऐसी चीजों के बारे में पता चल रहा है। उन्होंने इस संभावना से भी इनकार किया।

कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘मुझे (कांग्रेस नीत) महागठबंधन या यहां तक कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से (बैठक के लिए) कोई निमंत्रण नहीं मिला है। जब निमंत्रण आएगा तो देखेंगे। हम अपनी पार्टी में चर्चा के बाद फैसला करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं भाजपा नेताओं से अनुरोध करूंगा कि (भाजपा में) कई सक्षम नेता हैं, उनमें से 66 ने जीत हासिल की है। मैं दिल्ली में भाजपा नेताओं से भी अनुरोध करूंगा कि वे बिना समय बर्बाद किए भाजपा से किसी को विपक्ष का नेता नियुक्त करें, जो उचित होगा।’’

उन्होंने कहा कि वह भाजपा के केंद्रीय नेताओं को बताना चाहेंगे कि जद (एस) के साथ न तो कोई चर्चा हुई और न ही उन्होंने कोई मांग रखी है।

यह पूछे जाने पर कि यदि उन्हें पद की पेशकश की जाती है तो उनका रुख क्या होगा, इस पर कुमारस्वामी ने कहा, "नहीं। हमारी पार्टी ने 19 सीटें जीती हैं और उन्होंने 66 सीटें जीती हैं। (भाजपा में) सक्षम नेता हैं - पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व मंत्री हैं जो विपक्ष के नेता के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम हैं। यदि उन्हें विपक्ष का नेता बनाया जाए तो उचित होगा।’’

उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में जाने की संभावना से भी इनकार किया।

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय राजनीति में जाने या केंद्रीय मंत्री बनने का संकेत है क्योंकि कुछ लोग (अखबारों में) लिख रहे हैं कि मैं मंत्री बनने जा रहा हूं। न कोई मंत्री पद और न ही विपक्ष का नेता...मैं विधानसभा के एक साधारण सदस्य के रूप में काम करते हुए विधानसभा में राज्य के लोगों की आवाज उठाने का अपना कर्तव्य निभाऊंगा।’’

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