नयी दिल्ली, 13 मार्च देश के सभी शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए ‘‘समग्र और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण’’ के साथ विकास योजना तैयार करना अनिवार्य किया जाना चाहिए। आवास एवं शहरी मामलों पर एक संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है।
समिति ने कहा कि इस कार्य में यूएलबी की सहायता के लिए, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को वैश्विक तकनीकी सलाहकारों और विश्व स्तरीय नगर नियोजकों/विशेषज्ञों को शामिल करना चाहिए तथा आवश्यक धनराशि मुहैया करानी चाहिए।
आवास और शहरी मामलों संबंधी स्थायी समिति (2024-25) के अध्यक्ष मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी ने बुधवार को लोकसभा में ‘आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की अनुदान मांगों (2025-26)’ पर तीसरी रिपोर्ट पेश की।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उसका मानना है कि कई बार मंत्रालय की सर्वश्रेष्ठ योजनाएं विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपेक्षित मांग उत्पन्न करने में ‘‘विफल’’ हो जाती हैं। इसलिए, नियोजन की दिशा में एक कवायद से सभी क्षेत्रों की नागरिक आवश्यकताओं का उचित आकलन हो सकेगा।
उसने मंत्रालय को सभी हितधारकों से परामर्श करने और ‘विकसित भारत 2047’ के लिए एक व्यापक दृष्टिपत्र तैयार करने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विकसित भारत @2047 पहल का लक्ष्य 2047 में देश की स्वतंत्रता की शताब्दी तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इसमें कहा गया है कि यह परिवर्तनकारी रूपरेखा समावेशी विकास, सतत प्रगति और प्रभावी शासन पर जोर देती है।
समिति ने कहा, ‘‘बजट आवंटन को ‘विकसित भारत’ के व्यापक दृष्टिकोण के साथ संरेखित करने की आवश्यकता है, जिसमें अगले 20 वर्ष के लिए पांच वर्षीय निवेश लक्ष्य और उसके बाद वार्षिक निवेश लक्ष्य शामिल हों, क्योंकि इससे मंत्रालय को ‘विकसित भारत’ के उद्देश्य को हासिल करने के लिए आवश्यक सटीक दिशा मिलेगी।’’
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