देश की खबरें | कार्यपालिका पर अंकुश रखना विधायकों का कर्तव्य: खरगे

मुंबई, 17 जून कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को कहा कि कार्यपालिका पर अंकुश रखने के विधायकों के कर्तव्य को कम करके नहीं आंका जा सकता।

खरगे ने राष्ट्रीय विधायक सम्मेलन के समापन सत्र में एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘शक्तियों का पृथक्करण हमारे लोकतंत्र की आधारशिला है, यह सुनिश्चित करती है कि कार्यपालिका लोगों के प्रति जवाबदेह रहे।’’

उन्होंने कहा कि नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए जांच और संतुलन की एक मजबूत व्यवस्था बनाए रखते हुए, विधायकों के लिए इस जिम्मेदारी को अत्यंत परिश्रम के साथ निभाना महत्वपूर्ण है।

खरगे ने कहा, ‘‘हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र केवल बहस, विचार-विमर्श और चर्चा के जरिए ही काम कर सकता है।’’

उन्होंने राष्ट्रीय विधायक सम्मेलन आयोजित करने की पहल की सराहना की, जो देशभर के विधायकों को एक मंच पर साथ लाएगा जहां वे जनप्रतिनिधियों के रूप में अपने अनुभव साझा कर सकते हैं। खरगे ने कहा कि देश में संवैधानिक लोकतंत्र की नींव रखने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के अमूल्य योगदान पर विचार करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, "महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ बी आर आंबेडकर जैसे दूरदर्शी लोगों के हमारे देश की नियति को आकार देने के अथक प्रयासों को कम करके नहीं आंका जा सकता।"

खरगे ने कहा कि संसदीय बहसों और चर्चाओं की गुणवत्ता और मानकों को बढ़ाना बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘‘सूचित करके और रचनात्मक विचार-विमर्श के जरिये कि हम अपने विविध राष्ट्र की चिंताओं का समाधान कर सकते हैं और व्यापक समाधान पर पहुंच सकते हैं। हमें एक ऐसे माहौल को बढ़ावा देने का प्रयास करना चाहिए जिसमें विचारों पर उनकी योग्यता के आधार पर बहस हो, और हमारे विधायकों का सामूहिक ज्ञान हमारी नीतियों और कानून को आकार देता है।’’

सम्मेलन के लिए अपने संदेश में, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र एक ऐसे समाज का एक उल्लेखनीय उदाहरण है जहां मतभेदों को दूर करने के समृद्ध इतिहास के कारण विभिन्न धर्म, जातियों और क्षेत्रों के लोग सह-अस्तित्व में रह रहे हैं।

उन्होंने कहा,‘‘समावेश और सद्भाव के हमारे साझा मूल्यों को महान व्यक्तियों की दृष्टिकोण के आधार पर आकार मिला है। महात्मा गांधी से लेकर डॉ बी आर आंबेडकर तक, बासवन्ना, नारायण गुरु और गुरु नानक जैसे महान समाज सुधारक एक न्यायपूर्ण और मानवीय समाज के विचार में विश्वास करते थे और वे विविध लोगों को साथ लाकर बदलाव लाये।’’

गांधी ने कहा,‘‘मैंने सार्वजनिक जीवन में जो समय बिताया, विशेष रूप से पिछले दस महीनों में, मैं गंभीरता से सुनने के प्रबुद्ध ज्ञान का कायल हो गया हूं। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान, पहले दो हफ्तों के बाद, हम मौन हो गए। हजारों लोगों के साथ संक्षिप्त भेंट में मैंने सबसे सार्थक दृष्टि पायी।’’

पूर्व लोकसभा सदस्य ने कहा कि एक ऐसे मोड़ पर जहां लोगों को एकजुट करने की नैतिक जिम्मेदारी वाले नेता देश के नागरिकों को एक-दूसरे के खिलाफ कर रहे हैं, करुणा और सहानुभूति की शक्ति पर विचार करना उचित है जिसने दूरदर्शी नेताओं का मार्गदर्शन किया है।

गांधी ने कहा, ‘‘भारत का भविष्य उसके चुने गए नेताओं द्वारा अपनाये गये मूल्यों से आकार लेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यहां आप में से हर एक के पास हमारे सार्वजनिक मूल्यों को आकार देने और हमारी राजनीति को आगे बढ़ाने की शक्ति है। मुझे उम्मीद है कि हमारे विधायक भारत के समावेशी विचार के लिए लड़ते रहेंगे।’’

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