देश की खबरें | इजराइल संप्रभु राष्ट्रों पर हमला कर औपनिवेशक ठग की तरह कर रहा है बर्ताव: सांसद मेहदी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. नेशनल कांन्फ्रेंस (नेकां) के लोकसभा सदस्य आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने शुक्रवार को कहा कि इजराइल मनमाने ढंग से संप्रभु राष्ट्रों पर हमला करके एक "औपनिवेशिक ठग" की तरह व्यवहार कर रहा है।
श्रीनगर, 13 जून नेशनल कांन्फ्रेंस (नेकां) के लोकसभा सदस्य आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने शुक्रवार को कहा कि इजराइल मनमाने ढंग से संप्रभु राष्ट्रों पर हमला करके एक "औपनिवेशिक ठग" की तरह व्यवहार कर रहा है।
मेहदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ इज़राइल ने फलस्तीन, यमन, सीरिया, लेबनान और ईरान पर बमबारी की है तथा अपने को अब भी पीड़ित के रूप में पेश कर रहा है। यह दुष्ट यहूदी शासन खुद का बचाव नहीं कर रहा है बल्कि यह एक औपनिवेशिक ठग की तरह व्यवहार कर रहा है।’’
प्रभावशाली शिया नेता (मेहदी) ने कहा कि संप्रभु राष्ट्रों पर मनमाने ढंग से हमला करना ‘‘आपको शक्तिशाली नहीं बनाता है बल्कि, यह आपको आतंकवादी राष्ट्र बनाता है।"
श्रीनगर से लोकसभा सदस्य मेहदी ने कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र की तरह ईरान को भी अब अपनी रक्षा करने और ‘‘पूरा, दंडात्मक बदला लेने’’ का संपूर्ण अधिकार है।
मेहदी ने लिखा, ‘‘यहूदी शासन को गाजा में अपने अपराधों, अपनी रक्तपिपासा और अपने नरसंहारों की कीमत चुकानी ही चाहिए।’’
‘एक्स’ पर एक अन्य पोस्ट में मेहदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाजा में ‘‘तत्काल, बिना शर्त और स्थायी’’ युद्ध विराम की मांग करने वाले मसौदा प्रस्ताव पर मतदान से भारत का दूर रहना ‘‘नैतिक फलक के सिकुड़ जाने’’ का द्योतक है।
लोकसभा सदस्य ने कहा,‘‘भारत एक समय उत्तर-औपनिवेशिक देशों में सबसे आगे खड़ा था और फलस्तीनी लोगों समेत उत्पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करता था। (जवाहरलाल) नेहरू फलस्तीन में न्याय के लिए अपने समर्थन में दृढ़ थे। इंदिरा गांधी ने उस विरासत को कायम रखा। (लेकिन आज) क्या बदल गया है?"
उन्होंने कहा, ‘‘आज, भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में गाजा युद्धविराम प्रस्ताव पर मतदान से दूरी बना ली। गाजा में कुछ भी नहीं सुधरा है, अगर कुछ हुआ है, तो बस पीड़ा और बढ़ गई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह वह 'रणनीतिक स्वायत्तता' है जिसकी हम शेखी बघारते हैं? आज यह नैतिक फलक के सिकुड़ जाने को दर्शाता है। वैश्विक एकजुटता का परित्याग (कर दिया है हमने)। और सबसे दुखद बात यह है कि यह हमारे अपने इतिहास के साथ विश्वासघात है।’’
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