एजेंसी न्यूज

ईरान की चेतावनी, हमले जारी रहे तो कोई बॉर्डर सुरक्षित नहीं बचेगा

ईरान ने चेतावनी दी है अगर अमेरिकी हमले जारी रहे तो फिर कोई भी सीमा सुरक्षित नहीं होगी.

ईरान की चेतावनी, हमले जारी रहे तो कोई बॉर्डर सुरक्षित नहीं बचेगा
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

ईरान ने चेतावनी दी है अगर अमेरिकी हमले जारी रहे तो फिर कोई भी सीमा सुरक्षित नहीं होगी. यह बयान कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी हमलों से पहले आया.ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुज्तबा खमेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पूर्व प्रमुख मेजर जनरल मोहसेन रेजाई ने ईरानी मीडिया से बात करते हुए अमेरिका को सीधी चेतावनी दे दी है. रेजाई ने कहा, "अगर अमेरिकी हमले कुछ और दिनों तक जारी रहे, तो हम जंग को पूरी तरह दोबारा शुरू करने के चरण में कदम रखेंगे." ईरानी समाचार एजेंसी आईआरआईबी के अनुसार रेजाई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान अब केवल जवाबी या बराबरी की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा और इसके बाद कोई भी सीमा सुरक्षित नहीं बचेगी. उनके इस बड़े बयान के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए.

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए जो समझौता हुआ था, वह सिर्फ एक हफ्ते में ही टूट गया है. 25 जून को ईरान के एक ड्रोन ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक मालवाहक जहाज पर हमला कर दिया. इस हमले में कोई हताहत तो नहीं हुआ, लेकिन इसने दोनों देशों के बीच दोबारा जंग की शुरुआत कर दी. इस घटना के बाद से दोनों तरफ से लगातार मिसाइल और हवाई हमले किए जा रहे हैं.

इन हमलों के कारण एक महीने से भी कम समय में दोनों देश दोबारा पूर्ण युद्ध के मुहाने पर आकर खड़े हो गए हैं. दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के लिए तय की गई सीमाएं पार कर ली गई हैं. इस बीच यह तनाव अन्य खाड़ी देशों तक भी फैल गया है.

कुवैत पर हमले

कुवैत की सरकारी तेल कंपनी ने शनिवार, 18 जुलाई 2026 को अपने एक प्लांट पर ईरानी हमले की पुष्टि की है. कुवैत की आधिकारिक समाचार एजेंसी कुना ने कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के हवाले से बताया, "तेल क्षेत्र के एक अत्यंत महत्वपूर्ण ठिकाने पर ईरान की ओर से बार-बार भयानक हमले किए गए हैं. इन हमलों के कारण वहां काम करने वाले कई लोग घायल हुए हैं और बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ है." इस घटना के तुरंत बाद उस प्रभावित क्षेत्र को पूरी तरह से खाली करा दिया गया और घायल कर्मचारियों को इलाज के लिए भेजा गया है.

ईरान ने कुवैत में खारे पानी को पीने लायक बनाने वाले एक प्लांट को डीसैलिनेशन प्लांट पर दो बार हमले किए हैं. कुवैत जैसे सूखे देश के लिए यह प्लांट पानी का मुख्य जरिया है.

समुद्री रास्ते पर नियंत्रण का विवाद और जवाबी हमले

इस पूरे विवाद का मुख्य कारण होर्मुज स्ट्रेट है. ईरान जहाजों को वहां से निकलने नहीं दे रहा था. साथ ही उसने पहले ही चेतावनी दी थी कि कोई भी जहाज उस वैकल्पिक मार्ग का उपयोग न करे जिसकी निगरानी अमेरिकी सेना कर रही है. युद्ध की शुरुआत में 28 फरवरी को हुई जब अमेरिका और इस्राएल ने ईरान पर अचानक हमला किया था. इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के इस जलमार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया था. आम दिनों में दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता था. ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है ताकि वह अमेरिका के खिलाफ इसका इस्तेमाल आर्थिक दबाव बनाने के लिए कर सके.

शुरुआती समझौते में इस रास्ते को दोबारा खोलने की बात थी, लेकिन उसमें यह भी संकेत दिया गया था कि ईरान भविष्य में वहां से गुजरने वाले जहाजों से टैक्स वसूल सकता है. ईरान इसी बिंदु को आधार बनाकर इसे अपना अधिकार बता रहा है, जबकि अमेरिका और अन्य देश इसे पूरी तरह मुफ्त और खुला रखने की मांग कर रहे हैं.

25 जून के ड्रोन हमले के अगले ही दिन अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों, ड्रोन केंद्रों और तटीय रडार साइटों पर बमबारी की. इसके जवाब में ईरान ने अगले दिन एक और तेल टैंकर पर हमला किया. अमेरिका ने फिर से जवाबी कार्रवाई की तो ईरान ने अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले पड़ोसी देशों कुवैत और बहरीन को निशाना बनाना शुरू कर दिया. दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कतर में जाकर बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उनके बीच कोई सीधी मुलाकात नहीं हो सकी.

इसी दौरान अमेरिकी हवाई हमले में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खमेनेई का अंतिम संस्कार हुआ. इसमें शामिल लोगों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के खिलाफ नारे लगाए. इसके कुछ दिनों बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में तीन और जहाजों पर हमले किए. जवाब में अमेरिका ने ईरान के हवाई रक्षा तंत्र और रिवोल्यूशनरी गार्ड की 60 से अधिक छोटी नावों को नष्ट कर दिया.

इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के बदले तेल बेचने की दी गई छूट को भी रद्द कर दिया और उसके बंदरगाहों की दोबारा नाकेबंदी कर दी.

नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमले और ट्रंप की चेतावनी

इस सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने नाटो शिखर सम्मेलन से निकलने के बाद इस मुद्दे पर बयान दिया. डॉनल्ड ट्रंप ने कहा, "ये अमेरिकी हमले केवल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में किए गए हैं. अगर ऐसा दोबारा हुआ, तो अंजाम इससे भी बहुत बुरा होगा." इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो कुछ भी होना है, वह बहुत तेजी से होगा और अमेरिकी सेना इस काम को जल्द ही पूरा कर सकती है.

अब यह लड़ाई ईरान के अंदरूनी और उत्तरी इलाकों तक पहुंच चुकी है, जो होर्मुज स्ट्रेट से काफी दूर हैं. अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी हिस्से में पुलों और बिजली घरों पर बमबारी की है. ईरान सरकार के अनुसार, जब से यह लड़ाई दोबारा शुरू हुई है, तब से अमेरिकी हमलों में कम से कम 46 लोग मारे गए हैं और 400 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं.

इसके अलावा अब अमेरिकी प्रशासन होर्मुज स्ट्रेट पर सैन्य बल के जरिए नियंत्रण स्थापित करने की योजना पर भी विचार कर रहा है. इसके लिए ईरान के कब्जे वाले कुछ रणनीतिक द्वीपों को अपने नियंत्रण में लेना होगा. यदि अमेरिका ऐसा करता है, तो उसे खाड़ी क्षेत्र में अपनी नौसेना की उपस्थिति बहुत बड़े पैमाने पर बढ़ानी होगी और वहां हजारों की संख्या में सैनिकों को तैनात करना पड़ेगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 19, 2026 06:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).