नागपुर, 18 जुलाई केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को धमकी दिए जाने के मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए), आतंकवाद रोधी दस्ता (एटीएस) और आसूचना ब्यूरो (आईबी) के अधिकारियों ने नागपुर में आतंकवाद के मामले में दोषी अफसर पाशा से दो दिन तक पूछताछ की। पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि गैंगस्टर जयेश पुजारी ने पाशा के साथ मिलकर गडकरी को धमकी दी थी।
अधिकारी ने कहा कि छह घंटे तक चली पूछताछ के दौरान पाशा से 2003-04 में उसकी नागपुर की यात्रा के बारे में पूछा गया।
स्थानीय पुलिस गडकरी को फोन पर धमकी दिए जाने के मामले की जांच के सिलसिले में शनिवार को पाशा को बेलगावी जेल से नागपुर लाई थी।
अधिकारी ने बताया, “एनआईए, एटीएस और आईबी ने सोमवार और मंगलवार को बशीरुद्दीन नूर अहमद उर्फ अफसर पाशा से छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। हालांकि पाशा ने एजेंसियों को अपनी पिछली योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं दी। पाशा कथित तौर पर 2003-04 में नागपुर आया था। एजेंसियां (पुजारी द्वारा) गडकरी को धमकी भरा फोन कॉल और पाशा की नागपुर यात्रा के बीच संबंध का पता लगाने के प्रयास कर रही हैं।”
पुलिस ने पहले दावा किया था कि उसे पाशा के बेलगावी जेल में रहने के दौरान पुजारी उर्फ कांथा और शाकिर नामक व्यक्ति से उसके संपर्कों का पता चला था।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि प्रथम दृष्टया जांचकर्ताओं को संदेह है कि पाशा 2003-04 में ट्रेन से नागपुर आया था और मध्य नागपुर में रुका था।
पाशा दिसंबर 2005 में बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान पर हुए आतंकी हमले में शामिल था और फिलहाल बेलगावी जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
पुलिस ने बताया था कि पुजारी ने कथित तौर पर 14 जनवरी को नागपुर में गडकरी के जनसंपर्क कार्यालय में फोन पर धमकी देते हुए 100 करोड़ रुपये की मांग की थी। फोन करने वाले ने दावा किया था कि वह दाऊद इब्राहिम गिरोह का सदस्य है। उस समय जयेश पड़ोसी राज्य कर्नाटक की जेल में बंद था।
पुजारी ने 21 मार्च को एक बार फिर फोन कर धमकी दी थी कि अगर उसे 10 करोड़ रुपये नहीं दिए गए तो वह नागपुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकसभा सदस्य गडकरी को नुकसान पहुंचाएगा।
पुजारी को 28 मार्च को बेलगावी जेल से गिरफ्तार करके नागपुर लाया गया था और उसके खिलाफ कठोर गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मई में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक टीम धमकी मामले की जांच के सिलसिले में नागपुर आई थी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद एनआईए ने मामले में आतंकी पहलू की जांच शुरू की थी।
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