देश की खबरें | अंतर-धार्मिक विदेशियों ने विवाह के पंजीकरण के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय बुधवार को दो विदेशी नागरिकों की उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए राजी हो गया, जिसमें अंतर-धार्मिक जोड़ों से संबंधित भारतीय विवाह कानून के तहत अपने इच्छित विवाह के आयोजन और पंजीकरण की मांग की गई है।

नयी दिल्ली, दो नवंबर दिल्ली उच्च न्यायालय बुधवार को दो विदेशी नागरिकों की उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए राजी हो गया, जिसमें अंतर-धार्मिक जोड़ों से संबंधित भारतीय विवाह कानून के तहत अपने इच्छित विवाह के आयोजन और पंजीकरण की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की एकल पीठ ने याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ दिल्ली सरकार को अपनी दलीलों का सारांश दाखिल करने की छूट देते हुए कहा कि सरकार के लिए किसी भी अंतर-धार्मिक जोड़े को शादी करने से रोकना संभव नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ याचिकाकर्ताओं के यहां रहने की वजह से उन्हें विशेष विवाह अधिनियम के तहत लाभों का दावा करने का अधिकार है?

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल दो अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखते हैं और छह महीने से अधिक समय से दिल्ली में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे विशेष विवाह अधिनियम के तहत अपनी शादी रचाने और उसे पंजीकृत करने का इरादा रखते हैं, लेकिन इसके लिए वे ऑनलाइन आवेदन करने में असमर्थ हैं, क्योंकि वेबसाइट पर कम से कम एक पक्ष का भारतीय होना अनिवार्य है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि उनका एक मुवक्किल भारतीय विदेशी नागरिकता (ओसीआई) रखता है और शादी करने का अधिकार याचिकाकर्ताओं के जीवन के अधिकार का हिस्सा है।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘पक्षकारों को अपनी-अपनी दलीलें पूरी करने का वक्त देने के लिए 15 दिसंबर को याचिका सूचीबद्ध करें।’’

दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील शादान फरासत ने कहा कि वास्तविक मामलों में सैद्धांतिक रूप से ‘विवाह पर्यटन’ की अनुमति नहीं दी जा सकती है, लेकिन पर्याप्त समय से यहां रह रहे गैर-भारतीय पक्षों को विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी रचाने की अनुमति दी जा सकती है।

याचिकाकर्ताओं में से एक हिंदू कनाडाई नागरिक है, जिसके पास ओसीआई कार्ड है और दूसरा ईसाई अमेरिकी नागरिक है।

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा कि गैर-भारतीयों पर विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत अपनी शादी रचाने और पंजीकृत कराने पर कोई रोक नहीं है, जब तक कि वे वैधानिक आवश्यकताओं का पालन करते हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अधिनियम के तहत सहमति से दो बालिगों को विवाह करने से मना करना उनके विवाह के अधिकार का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व वकील ऋषभ कपूर ने किया।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उच्च न्यायालय ने समान तथ्यों और परिस्थितियों में पक्षकारों को अपने विवाह के पंजीकरण की सुविधा को सक्षम करने के लिए अपने दस्तावेज़ ऑफलाइन जमा करने की अनुमति दी है।

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