देश की खबरें | ‘प्रयागराज में कोविड-19 नियंत्रण के लक्ष्य से उचित साफ सफाई करने का निर्देश’
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

प्रयागराज, आठ सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को शहर में कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए उचित ढंग से फॉगिंग और सैनिटाइजेशन सुनिश्चित करने का सोमवार को निर्देश दिया।

पृथक-वास केन्द्रों में बेहतर सुविधाओं की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजित कुमार की खंडपीठ ने कहा, “नगर निगम द्वारा जो सबसे महत्वपूर्ण काम किया जाना है, वह है नगरवासियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना।”

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इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 14 सितंबर निर्धारित करते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि अगली तारीख तक नगर निगम को निश्चित तौर पर प्रयागराज नगर में प्रति दो वार्ड में कम से कम एक क्लिनिक का प्रस्ताव लेकर आना चाहिए। इन क्लिनिकों की स्थापना के बाद राज्य सरकार इनके लिए नियमित कर्मचारी डाक्टर उपलब्ध कराएगी।

अदालत के निर्देशानुसार, “राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने ऐसे 24 अधिवक्ताओं की सूची सौंपी है जो नगर के विभिन्न वार्डों में अधिवक्ता आयुक्त के तौर पर काम करेंगे। अदालत ने निर्देश दिया कि इन अधिवक्ताओं की अनुमति लेकर उन्हें वार्ड दिए जा सकते हैं और वे इसकी रिपोर्ट देंगे कि अमुक वार्डों में लोग दो गज की दूरी का पालन कर रहे हैं या नहीं और मास्क पहन रहे हैं या नहीं।”

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अदालत ने कहा कि यदि इन नियमों का उल्लंघन होता पाया जाता है तो अधिवक्ता आयुक्त इस संबंध में उस वार्ड के जोनल अधिकारी को रिपोर्ट दे सकते हैं, अंतत: यह रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

अदालत ने कहा, “यह कहने की जरूरत नहीं है कि रिपोर्ट साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए। अधिवक्ता आयुक्त अपने पार्षदों की मदद से अपने वार्ड का दौरा करेंगे और खराब जल-मल निकासी के संबंध में एक रिपोर्ट भी देंगे। यदि पार्षद सहयोग नहीं करता है तो इस संबंध में भी एक रिपोर्ट सौंपी जा सकती है।”

अदालत ने निर्देश दिया कि यदि किसी वार्ड में किसी सड़क की सतह खराब पाई जाती है तो अधिवक्ता आयुक्त इसकी सूचना नगर आयुक्त और इस अदालत को भी देंगे। अधिवक्ता आयुक्त यह भी देखेंगे कि नगर निगम प्राथमिक उपचार, ब्लड शुगर की जांच और ब्लड प्रेशर की जांच के उद्देश्य से प्रत्येक वार्ड में ‘जन क्लिनिक’ खोलने की योजना बनाए।

मौजूदा समय में इन क्लिनिकों का उपयोग कोविड-19 के लिए नमूना संग्रह केंद्र के तौर पर भी किया जा सकता है। इस बीच, राज्य सरकार के वकील ने इस बात से सहमति जताई कि जब भी ये क्लिनिक खोले जाते हैं, प्रांतीय चिकित्सा सेवाओं से डाक्टरों की नियुक्ति की जाएगी।

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