विदेश की खबरें | मुद्रास्फीति और आर्थिक संकट के कारण कुछ लोगों के लिये हज पर जाना हुआ मुश्किल
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. मिस्र की राजधानी काहिरा में विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर मोहम्मद ने कहा कि हज के लिए वह हर साल आवेदन करते हैं। लेकिन इस बार वह आवेदन नहीं कर रहे हैं।
मिस्र की राजधानी काहिरा में विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर मोहम्मद ने कहा कि हज के लिए वह हर साल आवेदन करते हैं। लेकिन इस बार वह आवेदन नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हज के मद्देनजर पैसे जुटाने के लिए वह आमतौर पर दैनिक खर्च में कटौती करके पैसे बचाते थे। लेकिन इस वर्ष महंगाई के चलते ऐसा करना मुश्किल रहा।”
बढ़ते पारिवारिक खर्चों और हज पैकेज की कीमतों में बढ़ोतरी ने इस वर्ष उनके लिए हज यात्रा को मुश्किल कर दिया।
मिस्र के आर्थिक समस्याओं के बारे में बात करने से जुड़ी संवेदनशीलता को देखते हुए मोहम्मद ने प्रतिशोध के डर से अपने उपनाम का इस्तेमाल न करने के लिए कहा।
वैश्विक मुद्रास्फीति के कारण हज की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिसमें पवित्र शहर मक्का में और उसके आसपास ठहरने, हवाई यात्रा, परिवहन, भोजन की कीमतों में बढ़ोतरी शामिल है।
बढ़ती मुद्रास्फीति और मुद्रा के मूल्य में गिरावट की मार झेल रहा पाकिस्तान इस साल अपना हज कोटा पूरा नहीं कर पाया।
रावलपिंडी में एक सरकारी कर्मचारी अब्दुल माजिद ने कहा कि वह हज के लिए पैसे बचा रहे थे, “लेकिन अब मैं हज पर नहीं जा रहा है। बचाए गए पैसे और हज यात्रा की कीमत के बीच बड़ा अंतर है, जिसे मैं पूरा नहीं कर सकता”।
गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020 और 2021 में हज पर पूरी तरह प्रतिबंधित था, जबकि पिछले वर्ष कम संख्या में लोगों को हज के लिए अनुमति दी गई थी।
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