जरुरी जानकारी | पश्चिम बंगाल में औद्योगिक इकाई ने निर्धारित शुल्कों के मामले में बिजली कंपनियों को अदालत में घसीटा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. पश्चिम बंगाल में औद्योगिक उपभोक्ताओं के एक वर्ग ने बिजली कंपनियों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान निर्धारित शुल्क में राहत समेत अन्य मांगों को खारिज किये जाने के कारण यह कदम उठाया है। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

कोलकाता, 31 मई पश्चिम बंगाल में औद्योगिक उपभोक्ताओं के एक वर्ग ने बिजली कंपनियों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान निर्धारित शुल्क में राहत समेत अन्य मांगों को खारिज किये जाने के कारण यह कदम उठाया है। एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी।

औद्योगिक उपभोक्ताओं ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल विद्युत नियामक आयोग ने भी उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया।

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उनके अनुसार, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने हाल ही में उपभोक्ताओं के साथ बातचीत के दौरान उद्योगों का समर्थन किया है।

मंत्री का सुझाव है कि पश्चिम बंगाल सरकार को कम से कम छह महीने के लिये भुगतानों को स्थगित करने की अनुमति देनी चाहिये, क्योंकि केंद्र ने पहले ही राज्य के स्वामित्व वाली बिजली वितरण कंपनियों को राहत पहुंचाने के लिये 90,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराये हैं।

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स्टील री-रोलिंग मिल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष विवेक अदुकिया ने कहा कि महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की सरकारों ने अपने औद्योगिक उपभोक्ताओं को कुछ लाभ दिये हैं। इन राज्यों ने बिजली के बिलों में लोड-फैक्टर पर छूट की घोषणा की है।

बिजली के मामले में निर्धारित शुल्क वह राशि है, जो उपभोक्ता ग्रिड से जुड़े रहने के लिये मासिक रूप से भुगतान करते हैं। इसके अलावा खपत के बाधार पर शेष शुल्क की गणना की जाती है।

अदुकिया ने पीटीआई- को बताया, "हमने दामोदर घाटी निगम के खिलाफ अदालत में अपील की है। अन्य उपभोक्ताओं ने मांग ठुकराये जाने के कारण डब्ल्यूबीएसईडीसीएल समेत अपने संबंधित आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ अपील की है।’’

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