देश की खबरें | पर्यावरण संरक्षण पर ठोस कदम उठाने वाली इंदिरा गांधी पहली और अंतिम प्रधानमंत्रीः जयराम रमेश
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हैदराबाद, 19 नवंबर पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिवंगत इंदिरा गांधी पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने वाली देश की पहली और अंतिम प्रधानमंत्री थीं। हालांकि उस समय इन मुद्दों को लेकर उनपर किसी समूह या मीडिया का कोई दबाव नहीं था।
गांधी की जयंती के मौके पर ऑल इंडिया प्रोफेशन्लस कांग्रेस की तेलंगाना इकाई द्वारा आयोजित एक वेबीनार में रमेश ने कहा कि कोविड-19 और सूनामी और कई राज्य में आने वाली बाढ़ कई मायनों में प्रकृति पर मानव के हमले को दर्शाती हैं।
रमेश ने कहा कि गांधी पर्यावरण पर ठोस काम करने वाली देश की पहली और अंतिम प्रधानमंत्री थीं। सभी लोग पर्यावरण और आर्थिक विकास के साथ-साथ चलने की बात करते हैं। लेकिन सख्त विकल्प चुनना और यह कानून बनाने में, संस्थान बनाने में, नियमन में सच्चाई प्रतिबिंबित होती है। उन्होंने कहा कि मेरे ख्याल से इंदिरा गांधी की महान विरासत आज सामयिक और प्रासंगिक है।
रमेश ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री की शासन नीति हमेशा प्रकृति रक्षति, रक्षिता पर यानी प्रकृति उन लोगों की रक्षा करती है जो उसका संरक्षण करते हैं और उन्होंने प्रकृति का संरक्षण करने में उल्लेखनीय निजी प्रतिबद्धता दिखाई है।
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कांग्रेस नेता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक सच्चाई है। यह अब वह बात नहीं रह गई है जिसके बारे में हम किताबों में पढ़ते हैं। इसका हम रोजाना सामना करते हैं। इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व और उनके प्रधानमंत्रित्व काल का यह पहलू आज भी बहुत प्रासंगिक है।
उनके मुताबिक, गांधी कांग्रेस शासित कुछ राज्यों के मुख्यमंत्रियों से खफा थी, क्योंकि वे पाबंदी के बावजूद बाघ सफारी चलाते थे।
रमेश ने कहा कि आपातकाल लगाने और आर्थिक नीतियों की वजह से उनकी आलोचना की गई, लेकिन यह इस समय प्रासंगिक नहीं है। गांधी का उल्लेखनीय व्यक्तित्व राजनीतिक नेताओं, खासकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध नेताओं के लिए आदर्श है।
उनसे केंद्र सरकार द्वारा हाल में बनाए गए तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के बारे में पूछा गया तो रमेश ने कहा, " मेरे ख्याल से हम भारतीय कृषि का कॉरपोरेटीकरण कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि जब आप भारतीय कृषि संस्कृति को कृषि व्यापार की दृष्टि से देखते हैं तो आप रोजगार को खत्म करने लग जाते हैं। पंजाब और हरियाणा में अधिकतर अंदोलन इसी वजह से हो रहे हैं।
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