विदेश की खबरें | सीओपी29 से भारत की उम्मीदें: समानता, वित्त और अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करें
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. विकासशील देशों की विशिष्ट आवश्यकताओं का सम्मान करते हुए सीओपी29 से अपनी प्रमुख अपेक्षाओं को रेखांकित करते हुए भारत ने मंगलवार को कहा कि वह ‘‘व्यापार में बाधाएं पैदा किए बिना’’ कार्बन बाजार तंत्र और नए लक्ष्यों के तहत जलवायु वित्त के पुनर्मूल्यांकन की उम्मीद कर रहा है।
बाकू (अजरबैजान), 12 नवंबर विकासशील देशों की विशिष्ट आवश्यकताओं का सम्मान करते हुए सीओपी29 से अपनी प्रमुख अपेक्षाओं को रेखांकित करते हुए भारत ने मंगलवार को कहा कि वह ‘‘व्यापार में बाधाएं पैदा किए बिना’’ कार्बन बाजार तंत्र और नए लक्ष्यों के तहत जलवायु वित्त के पुनर्मूल्यांकन की उम्मीद कर रहा है।
भारत और 190 से अधिक अन्य देशों के प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन संधि ढांचे (यूएनएफसीसीसी) के तहत वार्षिक जलवायु वार्ता ‘सीओपी 29’ के लिए अजरबैजान की राजधानी बाकू में एकत्र हुए हैं।
भारत के दृष्टिकोण को सामने रखते हुए आधिकारिक सूत्रों ने साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों (सीबीडीआर) के सिद्धांत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से उत्सर्जक रहे विकसित देशों को शमन प्रयासों एवं जलवायु वित्त पोषण में अगुवाई करनी चाहिए।
सीओपी29 में भारत की प्राथमिकताओं में विकासशील देशों को विशेष रूप से अनुकूलन प्रयासों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करना तथा सभी जलवायु वार्ताओं में निष्पक्ष और न्यायसंगत दृष्टिकोण सुनिश्चित करना शामिल हैं।
सूत्रों ने कहा कि भारत की प्राथमिक अपेक्षाओं में से एक नए सामूहिक परिमाणित लक्ष्य (एनसीक्यूजी) के तहत जलवायु वित्त का पुनर्निर्धारण है।
एनसीक्यूजी सीओपी29 के लिए चर्चा का मुख्य विषय है। इसके तहत आशा है कि धनी देश निर्धन देशों में जलवायु संबंधी कार्रवाइयों के लिए सालाना वित्तीय योगदान दें।
भारत ‘ग्लोबल साउथ’ में कमजोर समुदायों के अनुकूलन के लिए समर्थनकारी पर्याप्त और सुलभ जलवायु वित्त का मुखर समर्थक रहा है। सूत्रों ने जलवायु वित्त के ‘मुख्य बिंदुओं’ को फिर संतुलित करने के लिए सीओपी29 की आवश्यकता पर बल दिया।
सूत्रों ने कहा, ‘‘हम सीओपी29 को एक ऐसे अवसर के रूप में देखते हैं जो हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ प्रमुख मुद्दों के मिलान को आगे बढ़ाता हो।’’
उन्होंने सतत विकास, संतुलित जलवायु कार्रवाई और लचीलापन अपनाने को मुख्य उद्देश्य बताया।
वैसे तो शमन निवेश पर बहुत अधिक ध्यान दिया गया है लेकिन भारत ने इस बात जोर दिया है कि सीओपी29 की चर्चा में कमजोर समुदायों के लिए अनुकूलन जरूरतों को पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए तथा वित्तीय सहयोग “पर्याप्त, पूर्वानुमानित, सुलभ, अनुदान-आधारित, कम-ब्याज और दीर्घकालिक” होना चाहिए।
सूत्रों ने कहा कि पेरिस समझौते के अनुच्छेद छह के तहत कार्बन बाजार के सिलसिले में भारत को एक ऐसे बाजार तंत्र की स्थापना की उम्मीद है जो व्यापार में बाधाएं पैदा किए बिना कम कार्बन विकास को प्रोत्साहित करने के लिए ‘कार्बन क्रेडिट’ का उपयोग करता हो।
सोमवार को यहां वैश्विक जलवायु वार्ता के पहले दिन एक ऐतिहासिक निर्णय में, सीओपी29 ने अनुच्छेद छह के अंतर्गत पेरिस समझौते के तंत्र के लिए नए परिचालन मानक आधिकारिक रूप से अपनाये, जिससे वैश्विक कार्बन बाजार के लिए मंच तैयार हो गया।
सूत्रों ने कहा कि भारत की दृष्टि से सीओपी29 को यह स्वीकार करना चाहिए कि ऊर्जा परिवर्तन के तहत अनुचित दायित्व नहीं थोपे जाने चाहिए, बल्कि इसके बजाय विकासशील देशों को निष्पक्ष और अनुकूलित तरीके से अपने ऊर्जा लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए समर्थन प्रदान किया जाना चाहिए।
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