देश की खबरें | भारतीय रेल ने पड़ोसी देश नेपाल को दी अपने बुनियादी ढांचे के उपयोग की अनुमति
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नयी दिल्ली, नौ जुलाई भारत-नेपाल के बीच रेल परिचालन के लिए शुक्रवार का दिन बेहद खास रहा जब भारतीय रेल ने सभी मालवाहक ट्रेन परिचालकों को पड़ोसी हिमालयी देश तक सामान ले जाने और लाने के लिए अपने बुनियादी ढांचे का उपयोग करने की अनुमति दे दी।
यह सामान भारत-नेपाल के बीच द्विपक्षीय व्यवस्था के तहत लाने ले जाने वाला या फिर भारतीय बंदरगाहों से होते हुए नेपाल जाने वाले किसी तीसरे देश का सामान भी हो सकता है।
रेलवे ने एक बयान में कहा, ‘‘इस उदारीकरण से बाजार की ताकतों को नेपाल के रेलवे मालवाहक क्षेत्र में आने का अवसर मिलेगा और इससे प्रतिस्पर्धी कीमत बढ़ेगी, इससे अंतत: नेपाल के उपभोक्ताओं को ही लाभ होगा।’’
भारतीय रेल ने सभी मालवाहक ट्रेन परिचालकों को पड़ोसी हिमालयी देश तक सामान ले जाने के लिए अपने बुनियादी ढांचे का उपयोग करने की अनुमति दे दी। यह व्यवस्था शुक्रवार से लागू हो गई। इसके लिए भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई और आदान प्रदान पत्र (लैटर ऑफ एक्सचेंज) पर हस्ताक्षर भी किए गए।
रेल मंत्रालय से जारी एक बयान में कहा गया है ‘‘आदान प्रदान पत्र पर हस्ताक्षर के बाद भारतीय रेलवे नेटवर्क पर सामान ले जाने वाली हर श्रेणी की वैगनों में हर तरह का सामान नेपाल ले जाया जा सकता है और वहां से यहां लाया जा सकता है। इन मालवाहक ट्रेन परिचालकों में सार्वजनिक एवं निजी मालवाहक ट्रेन परिचालक शामिल हैं जो भारतीय रेल द्वारा अधिकृत हों।’’
दोनों देशों के बीच मालवाहक ट्रेन सेवा शुरू करने के लिए 2004 में रेल सेवा समझौता हुआ था । यह ट्रेनें भारत के रक्सौल के रास्ते होते हुए नेपाल के बीरगंज तक जानी थीं।
रेल मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच इस आशय का समझौता था, लेकिन इस संबंध में कोई रुपरेखा नहीं होने के कारण ट्रेनों की आवाजाही नहीं थी। तब से विभिन्न बदलाव हुए हैं, जिनकी वजह से रेल सेवा समझौता में बदलाव आवश्यक हो गया।
समझौते की धारा 1.4 में एक प्रावधान है जिसके अनुसार, ‘‘समझौते की समीक्षा हर पांच साल में होनी चाहिए और संबंधित पक्षों की परस्पर सहमति से उसमें बदलाव किया जा सकता है।’’
रेल मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि नेपाल रेलवे कंपनी की वैगनें भी सामान लाने ले जाने के लिए मानक और प्रक्रियाओं के मुताबिक भारतीय रेल नेटवर्क का उपयोग कर सकती हैं।
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