जरुरी जानकारी | भारत, अमेरिका की टीमों ने प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए पांचवें दौर की वार्ता पूरी की: अधिकारी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारत और अमेरिका की टीमों ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के लिए 17 जुलाई को वाशिंगटन में पांचवें दौर की वार्ता पूरी कर ली है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह वार्ता वाशिंगटन में चार दिन (14-17 जुलाई) तक चली।
नयी दिल्ली, 19 जुलाई भारत और अमेरिका की टीमों ने प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के लिए 17 जुलाई को वाशिंगटन में पांचवें दौर की वार्ता पूरी कर ली है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह वार्ता वाशिंगटन में चार दिन (14-17 जुलाई) तक चली।
अधिकारी ने कहा, “भारतीय टीम वापस आ रही है।” भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल वार्ता दल का नेतृत्व कर रहे हैं।
ये विचार-विमर्श इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दोनों पक्ष एक अगस्त से पहले एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर विचार कर रहे हैं, जब भारत सहित दर्जनों देशों पर लगाए गए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शुल्क (26 प्रतिशत) की निलंबन अवधि का अंतिम दिन है।
इस साल दो अप्रैल को, ट्रंप ने इन उच्च जवाबी शुल्कों की घोषणा की थी। उच्च शुल्कों के कार्यान्वयन को तुरंत 90 दिनों के लिए नौ जुलाई तक और फिर एक अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया था क्योंकि अमेरिका कई देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है।
पांचवें दौर की वार्ता में कृषि और वाहन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। गैर-बाज़ार अर्थव्यवस्थाओं और ‘स्कॉमेट’ (विशेष रसायन, जीव, सामग्री, उपकरण और प्रौद्योगिकी) से निपटने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
कृषि और डेयरी उत्पादों पर शुल्क में रियायत की अमेरिकी मांग पर भारत ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। कुछ किसान संगठनों ने सरकार से आग्रह किया है कि व्यापार समझौते में कृषि से जुड़े किसी भी मुद्दे को शामिल न किया जाए।
भारत इस अतिरिक्त शुल्क (26 प्रतिशत) को हटाने की मांग कर रहा है। वह इस्पात और एल्युमीनियम (50 प्रतिशत) और वाहन (25 प्रतिशत) क्षेत्रों पर शुल्क में ढील की भी मांग कर रहा है। इनके विरुद्ध, भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मानदंडों के तहत प्रतिशोधात्मक शुल्क लगाने का अपना अधिकार सुरक्षित रखा है।
प्रस्तावित व्यापार समझौते में देश श्रम-प्रधान क्षेत्रों जैसे वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, चमड़े के सामान, परिधान, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले के लिए शुल्क रियायत की भी मांग कर रहा है।
दूसरी ओर, अमेरिका कुछ औद्योगिक वस्तुओं, वाहन, विशेषकर इलेक्ट्रिक वाहनों, वाइन, पेट्रोकेमिकल उत्पादों, कृषि वस्तुओं, डेयरी उत्पादों, सेब, मेवे और आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों पर शुल्क रियायत चाहता है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 19, 2025 03:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

