देश की खबरें | भारत-अमेरिका की जलवायु साझेदारी स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, वैश्विक सहयोग के लिए अहम : विशेषज्ञ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ में अहम स्थान रखने वाले भारत की अमेरिका के साथ जलवायु साझेदारी से जलवायु कार्रवाई पर अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।

नयी दिल्ली, 23 जून विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ में अहम स्थान रखने वाले भारत की अमेरिका के साथ जलवायु साझेदारी से जलवायु कार्रवाई पर अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा।

साथ ही यह साझेदारी दोनों देशों और समग्र विश्व के लिए अधिक टिकाऊ और लचीले भविष्य के वास्ते योगदान दे सकती है।

विशेषज्ञों ने नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निवेश और सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि द्विपक्षीय सहयोग दोनों देशों के लिए आर्थिक लाभ प्राप्त करने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती से निपटने का एक अवसर है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ एक संयुक्त प्रेसवार्ता में कहा कि जी20 में भारत एकमात्र देश है जिसने पेरिस में जलवायु परिवर्तन पर किये गये सभी वादों को पूरा किया है।

मोदी ने कहा कि भारत न केवल अपनी जिम्मेदारियां निभाएगा बल्कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में अमेरिका सहित दूसरों की मदद भी करेगा। वहीं, बाइडन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन मनुष्य के सामने सबसे गंभीर समस्या है।

‘द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टिट्यूट’ (टेरी) में कार्यक्रम निदेशक आर.आर. रश्मि ने कहा कि मोदी और बाइडन के बयान त्वरित एवं स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के लिए तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।

उन्होंने कहा कि इसका लक्ष्य केवल वित्त हस्तांतरण या उत्सर्जन में कटौती नहीं बल्कि इस मामले में पिछड़ रहे देशों को प्रोत्साहित करना है।

रश्मि ने कहा, ‘‘ इस संदेश के मायने यह हैं कि पिछड़ रहे देशों को जलवायु परिवर्तन से लड़ने की दिशा में और कार्य करने की जरूरत है। दरअसल, उन्होंने (मोदी) कहा है कि विकसित देशों ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है। तो, एक तरह से, वह इस तथ्य का जिक्र कर रहे थे कि विकसित देशों और उन देशों के लोगों को अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए नीतियां अपनानी चाहिए।’’

‘आईफोरेस्ट’ के संस्थापक चंद्रभूषण ने नयी दिल्ली के उस अद्यतन जलवायु लक्ष्य को प्राप्त करने में भारत-अमेरिका की साझेदारी के महत्व पर जोर दिया, जिसमें 2030 तक अपने सकल घरेलू उत्पाद के उत्सर्जन को 33-35 प्रतिशत (2005 उत्सर्जन स्तर की तुलना में) के पहले लक्ष्य के मुकाबले 45 प्रतिशत कम करना और 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 50 प्रतिशत संचयी स्थापित विद्युत क्षमता प्राप्त करना शामिल है।

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में ‘‘मेक इन इंडिया’’ पहल की जारी सफलता के साथ समानताएं दर्शाते हुए, विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों, बैटरी प्रौद्योगिकी और नवीकरणीय ऊर्जा में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के महत्व पर प्रकाश डाला।

चंद्रभूषण ने कहा, ‘‘विश्व बैंक में सबसे बड़ा शेयरधारक होने के नाते अमेरिका विकासशील देशों में जलवायु निवेश के लिए इसकी ऋण नीतियों को प्रभावित कर सकता है।’’

जलवायु नीति विशेषज्ञ ने कहा कि भारत के साथ सहयोग से कम लागत वाले सौर पैनल के लिए चीन पर अमेरिका की निर्भरता भी कम हो जाएगी।

चंद्रभूषण ने कहा, ‘‘वर्तमान में, अमेरिका सौर पैनल के आयात के लिए चीन पर निर्भर है क्योंकि बीजिंग सस्ती दर पर इनका उत्पादन कर रहा है। हालांकि, भारत भी ऐसा कर सकता है, क्योंकि भारत की श्रम लागत कम है, ऐसे में वह सौर पैनल का उत्पादन कर उसे कम कीमत पर अमेरिका को उपलब्ध करा सकता है।’’

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