जरुरी जानकारी | जैविक कृषि वस्तुओं के व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए भारत, ताइवान समझौता लागू हुआ

नयी दिल्ली, 10 जुलाई भारत और ताइवान के बीच चाय और औषधीय पौधों सहित जैविक रूप से उत्पादित वस्तुओं के व्यापार को सुगम बनाने के लिए समझौता आठ जुलाई से लागू हो गया है। वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी।

पारस्परिक मान्यता समझौता (एमआरए) दोहरे प्रमाणन से बचकर जैविक उत्पादों के निर्यात को आसान बनाएगा, जिससे अनुपालन लागत में कमी आएगी, केवल एक विनियमन का पालन करके अनुपालन आवश्यकताओं को सरल बनाया जा सकेगा और जैविक क्षेत्र में व्यापार के अवसरों को बढ़ाया जा सकेगा।

इसमें कहा गया है कि यह समझौता चावल, प्रसंस्कृत खाद्य, हरी, काली और हर्बल चाय, औषधीय पौधों के उत्पादों जैसे प्रमुख भारतीय जैविक उत्पादों के ताइवान को निर्यात का मार्ग प्रशस्त करेगा।

‘एमआरए’ के लिए कार्यान्वयन एजेंसियां ​​- भारत का कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) और ताइवान की ‘कृषि और खाद्य एजेंसी’ हैं।

मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘भारत और ताइवान के बीच जैविक उत्पादों के लिए एमआरए आठ जुलाई से लागू किया गया है।’’

समझौते के तहत, राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम के अनुरूप जैविक तरीके से उत्पादित और संभाले गए कृषि उत्पादों को और प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ ताइवान में जैविक रूप से उत्पादित के रूप में बिक्री की अनुमति है। इसमें ‘भारत जैविक’ लोगो का प्रदर्शन भी शामिल है।

इसमें कहा गया है, ‘‘इसी तरह, जैविक कृषि संवर्धन अधिनियम के अनुरूप जैविक तरीके से उत्पादित और संभाले गए कृषि उत्पादों को और ताइवान के विनियमन के तहत एक मान्यता प्राप्त प्रमाणन निकाय द्वारा जारी जैविक प्रदर्शन दस्तावेज (लेनदेन प्रमाण पत्र आदि) के साथ भारत में जैविक रूप से उत्पादित के रूप में बिक्री की अनुमति है। इसमें ताइवान जैविक लोगो का प्रदर्शन भी शामिल है।’’

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