जरुरी जानकारी | भारत को बाब-अल-मंडेब जलसंधि मार्ग पर निर्भरता कम करने की जरूरतः रिपोर्ट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारत को लाल सागर से गुजरने वाले प्रमुख मार्ग बाब-अल-मंडेब जलसंधि पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए समुद्र में वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश करने की जरूरत है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने मंगलवार को यह बात कही।

नयी दिल्ली, 19 दिसंबर भारत को लाल सागर से गुजरने वाले प्रमुख मार्ग बाब-अल-मंडेब जलसंधि पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के लिए समुद्र में वैकल्पिक व्यापार मार्गों की तलाश करने की जरूरत है। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने मंगलवार को यह बात कही।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने एक रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के साथ देश के व्यापार को किसी भी प्रभाव से दूर रखने के लिए भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह जैसे वैकल्पिक मार्ग विकसित करने होंगे।

दरअसल, यमन के हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों से भूमध्य सागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बाब-अल-मंडेब जलसंधि के आसपास के हालात खराब हो गए हैं।

बाब-अल-मंडेब जलसंधि को अरबी में ‘आंसू का द्वार’ भी कहा जाता है। यह लाल सागर और स्वेज नहर के जरिये भूमध्य सागर और हिंद महासागर को जोड़ने वाला अहम समुद्री व्यापार मार्ग है। यह अफ़्रीका को अरब प्रायद्वीप से अलग करता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक कंटेनर यातायात के 30 प्रतिशत हिस्से के लिए अहम इस जलसंधि क्षेत्र में विभिन्न घटनाओं की वजह से तनाव बढ़ गया है। ऐसे में इस समुद्री व्यापार मार्ग पर अधिक निर्भर भारत को लागत में वृद्धि और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।

इस मार्ग के बंद होने से यूरोप और भारत एवं समूचे एशिया के बीच एक अहम व्यापारिक संबंध टूट गया है। यूरोप जाने वाले जहाजों को अब अफ़्रीका के निचले सिरे पर स्थित ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा। इस बदलाव से यात्रा की दूरी 40 प्रतिशत बढ़ जाती है जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाएगी।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि व्यापार मार्गों में विविधता लाने और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के प्रयासों को बढ़ावा देने की जरूरत है।

जीटीआरआई के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘भारत अपने कच्चे तेल, एलएनजी आयात और पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप के साथ व्यापार के लिए बाब-अल-मंडेब जलसंधि पर बहुत अधिक निर्भर है। ऐसे में कोई भी गतिरोध भारत की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।’’

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