विदेश की खबरें | भारत, फ्रांस ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. भारत और फ्रांस ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों ने घोषणा की है कि वे प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के वास्ते अंतरराष्ट्रीय कानूनी रूप से बाध्यकारी उपाय के लिए बातचीत करेंगे और अन्य समान विचारधारा वाले देशों को भी रचनात्मक रूप से इसमें शामिल किया जायेगा।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

पेरिस, 15 जुलाई भारत और फ्रांस ने जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों ने घोषणा की है कि वे प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के वास्ते अंतरराष्ट्रीय कानूनी रूप से बाध्यकारी उपाय के लिए बातचीत करेंगे और अन्य समान विचारधारा वाले देशों को भी रचनात्मक रूप से इसमें शामिल किया जायेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के बीच शुक्रवार को यहां बातचीत के बाद दोनों देशों ने एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक के ऐसे उत्पादों जिनकी उपयोगिता कम और कूड़ा फैलाने की क्षमता अधिक है पर प्रतिबंध लगाने समेत एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के प्रदूषण को खत्म करने के लिए संयुक्त प्रतिबद्धता जताई।

मैक्रों के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण भारत और फ्रांस दोनों के लिए प्रमुख प्राथमिकता रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इस दिशा में हमने पहले ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना की थी, जो अब एक आंदोलन बन गया है। अब हम ‘ब्लू इकोनॉमी’ और समुद्री प्रशासन की रूपरेखा पर तेजी से काम करना चाहते हैं।

समुद्र और उसके उत्पादों पर आधारित अर्थव्यवस्था को ‘ब्लू इकोनॉमी’ कहा जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के खिलाफ संयुक्त पहल पर आगे बढ़ेंगे। मैं तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के निर्यात के लिए इंडियन ऑयल और फ्रांसीसी कंपनी ‘टोटल’ के बीच हुए दीर्घकालिक समझौते का स्वागत करता हूं।’’ यह हमारे स्वच्छ उर्जा के परिवहन के लक्ष्य को मजबूती प्रदान करेगा।

दोनों देशों ने कहा है कि प्लास्टिक कचरे के कारण होने वाला वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दा है जिससे तुरंत निपटे जाने की जरूरत है।

भारत और फ्रांस ने कहा है कि इसका सामान्य रूप से पारिस्थितिक तंत्र और विशेष रूप से समुद्री पारिस्थितिक तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

मोदी और मैक्रों के बीच वार्ता के बाद जारी एक संयुक्त दस्तावेज के अनुसार दोनों देशों ने एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों के कारण होने वाले प्रदूषण को खत्म करने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की दिशा में प्रगति हुई है।

दोनों देशों ने कहा कि प्रदूषण फैलाने की आशंका वाले एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पादों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना चाहिए।

फ्रांस और भारत ने एकल-उपयोग वाले कुछ प्लास्टिक उत्पादों की खपत और उत्पादन को कम करने और समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए उठाए गए कई उपायों का हवाला दिया।

दोनों देशों ने घोषणा की है कि वे प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी रूप से बाध्यकारी उपाय के संबंध में बातचीत करेंगे और अन्य समान विचारधारा वाले देशों को रचनात्मक रूप से इसमें शामिल करेंगे।

भारत और फ्रांस ने कहा कि वे भारत के शहरीकरण और औद्योगीकरण से प्रेरित ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और एसडीजी 7 तथा पेरिस जलवायु समझौते के उद्देश्यों को प्राप्त करने के तिहरे उद्देश्य के साथ निम्न कार्बन अर्थव्यवस्था को लेकर निकट सहयोग कर रहे हैं।

दस्तावेज में कहा गया है, ‘‘भारत और फ्रांस मानते हैं कि पेरिस समझौते के दीर्घकालिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए ऊर्जा के स्वच्छ स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाना आवश्यक है। भारत और फ्रांस का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में स्थायी समाधानों में परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल शामिल है।’’

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