देश की खबरें | भारत ने 24वां करगिल विजय दिवस मनाया, राजनाथ ने कहा-देश के सम्मान और प्रतिष्ठा के लिए एलओसी पार करने को भी तैयार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत ने 1999 के करगिल युद्ध में पाकिस्तान पर अपनी जीत बुधवार को 24वें करगिल विजय दिवस के तौर पर मनायी तथा अपने सशस्त्र बलों की वीरता को याद करते हुए अपने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
नयी दिल्ली, 26 जुलाई भारत ने 1999 के करगिल युद्ध में पाकिस्तान पर अपनी जीत बुधवार को 24वें करगिल विजय दिवस के तौर पर मनायी तथा अपने सशस्त्र बलों की वीरता को याद करते हुए अपने शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश अपने सम्मान और प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए नियंत्रण रेखा (एलओसी) को पार करने के लिए भी तैयार है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और नेताओं ने युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। 24वें करगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में राज्यों और लद्दाख के द्रास में करगिल युद्ध स्मारक पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। संसद में सदस्यों ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी।
मुर्मू ने ट्वीट किया, "आज करगिल विजय दिवस के गौरवशाली अवसर पर सभी देशवासी हमारे सशस्त्र बलों के असाधारण पराक्रम से अर्जित की गई विजय को याद करते हैं। देश की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान करके विजय का मार्ग प्रशस्त करने वाले सैनिकों को एक कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से मैं श्रद्धांजलि देती हूं। उनकी शौर्य गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी। जय हिन्द।’’
मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘करगिल विजय दिवस भारत के उन अद्भुत पराक्रमियों की शौर्यगाथा को सामने लाता है, जो देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणाशक्ति बने रहेंगे। इस विशेष दिवस पर मैं उनका हृदय से नमन और वंदन करता हूं। जय हिंद!’’
भारतीय सेना ने 1999 में लद्दाख की अहम चोटियों पर अवैध तरीके से कब्जा करने वाली पाकिस्तानी सेना को पीछे खदेड़ने के लिए एक तगड़ा जवाबी हमला किया था। करगिल विजय दिवस भारत की अपने पड़ोसी पर जीत को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है।
युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों ने द्रास, करगिल और बटालिक सेक्टरों में कठोर मौसम की स्थिति के बीच सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में लड़ाई लड़ी थी।
द्रास में करगिल स्मारक पर एक सभा को संबोधित करते हुए, रक्षा मंत्री सिंह ने कहा कि भारत अपने सम्मान और प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए नियंत्रण रेखा (एलओसी) को पार करने के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने आम नागरिकों से ऐसी स्थिति में सैनिकों के समर्थन के लिए तैयार रहने का आह्वान भी किया।
रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध एक साल से भी अधिक समय से चल रहा है क्योंकि नागरिक आगे आए और युद्ध में हिस्सा ले रहे हैं।
सिंह ने यहां 24वें करगिल विजय दिवस के अवसर पर करगिल युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर, 1999 के करगिल युद्ध में अपना जीवन बलिदान करने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, ‘‘हम देश का सम्मान और प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं... अगर इसके लिए एलओसी पार करना हो, तो हम वह भी करने के लिए तैयार हैं... अगर हमें उकसाया गया और जरूरत पड़ी तो हम एलओसी को पार कर जाएंगे।’’
मंत्री ने कहा, ‘‘जब भी युद्ध की स्थिति होती है, हमारी जनता ने हमेशा हमारे जवानों का समर्थन किया है लेकिन यह समर्थन अप्रत्यक्ष रूप से रहा है। मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे जरूरत पड़ने पर युद्धभूमि में सैनिकों को प्रत्यक्ष रूप से और मानसिक रूप से सहयोग करने के लिए तैयार रहें।’’
सिंह ने कहा कि करगिल युद्ध भारत पर थोपा गया था और पाकिस्तान ने हमारी पीठ में ‘‘छुरा भोंका’’ था। उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन विजय के दौरान भारतीय सेना ने न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश दिया था कि जब हमारे राष्ट्रीय हित की बात आएगी तो हमारी सेना किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगी। हम आज भी अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।’’
सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने द्रास में संवाददाताओं से कहा कि देश 1999 के करगिल युद्ध में सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने कहा, ‘‘ऑपरेशन विजय एक मुश्किल और उच्च तीव्रता वाला सैन्य अभियान था। वह मुश्किल इलाका था जो दुश्मन के कब्जे में था। यह एक चुनौती थी जिसका हमारे सैनिकों ने पूरी बहादुरी के साथ सामना किया...। मैं अंतिम लक्ष्य हासिल करने में वायु सेना के जवानों के योगदान का भी जिक्र करना चाहूंगा।’’
सेना प्रमुख पांडे ने कहा कि सशस्त्र बलों के समक्ष मौजूद खतरों एवं चुनौतियों के भविष्य में और जटिल होने की आशंका है और भारत को उनका सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
घुसपैठियों से भारतीय क्षेत्र की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जवानों के परिवारों के लिए, करगिल विजय दिवस एक ऐसा अवसर है जो दर्द और गर्व दोनों की भावनाओं को जगाता है।
अपने बेटे ग्रेनेडियर उदयमान सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए करगिल युद्ध स्मारक पर पहुंचीं कांता देवी ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ''मुझे यह देखकर खुशी और गर्व महसूस हो रहा है कि हर कोई मेरे बेटे को सम्मान दे रहा है, लेकिन मैं अपने बेटे को (केवल) खोना नहीं चाहती थी। मुझे अपने बेटे को खोने का दर्द है।’’
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