भारत ने दी 1.3 लाख करोड़ के समुद्री बीमा पूल को मंजूरी
वैश्विक तनाव और ईरान संकट के बीच भारत सरकार ने 1.
वैश्विक तनाव और ईरान संकट के बीच भारत सरकार ने 1.3 लाख करोड़ रुपये के समुद्री बीमा पूल को मंजूरी दी है, ताकि व्यापार बाधित न हो. साथ ही महंगाई के असर को कम करने के लिए कर्मचारियों का भत्ता भी बढ़ाया गया है.भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण समुद्री व्यापार और सप्लाई चेन पर बढ़ते जोखिम के चलते बीच भारत ने एक अहम रणनीतिक कदम उठाते हुए घोषणा की है कि वह 1.3 लाख करोड़ रुपये के समुद्री बीमा पूल को मंजूरी देगा.
पिछले कुछ महीनों में ईरान से जुड़े संघर्ष और रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों ने अंतरराष्ट्रीय बीमा और पुनर्बीमा बाजार को झटका दिया है, जिसके चलते कई बड़ी कंपनियों ने कवरेज घटा दिया या प्रीमियम में भारी वृद्धि कर दी. इससे न केवल शिपिंग उद्योग बल्कि वैश्विक व्यापार प्रवाह पर भी असर पड़ने लगा. ऐसे में भारत सरकार ने 129.8 अरब रुपये (करीब 1.4 अरब डॉलर) की गारंटी के साथ एक घरेलू समुद्री बीमा पूल को मंजूरी दी है, ताकि बाहरी निर्भरता कम की जा सके और व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके. यह कदम आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिहाज से अहम माना जा रहा है.
बीमा संकट के बीच रणनीतिक कदम
सरकार के अनुसार, यह समुद्री बीमा पूल 10 सालों तक चलेगा और जरूरत पड़ने पर इसे पांच सालों तक और बढ़ाया जा सकता है. भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह पहल प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बीमा कवरेज के हटने की स्थिति में देश की "संप्रभुता और व्यापार की निरंतरता” बनाए रखने के लिए जरूरी थी. इस पूल के तहत जहाजों की संरचना, माल ढुलाई और युद्ध जोखिम के साथ साथ सभी प्रमुख समुद्री जोखिम कवर किए जाएंगे. सदस्य बीमा कंपनियां लगभग 9.50 अरब रुपये की संयुक्त अंडरराइटिंग क्षमता के साथ पॉलिसियां जारी करेंगी.
कैसे काम करेगा बीमा और क्यों जरूरी
यह काम पुनर्बीमा कंपनियों के जरिए होता है. पुनर्बीमा कंपनियां (Reinsurance Companies) "बीमा कंपनियों की बीमा कंपनी" कहलाती हैं. ये वे संस्थाएं हैं जो सामान्य बीमा कंपनियों जैसे एलआईसी, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई आदि जैसी कंपनियों के जोखिम को अपने ऊपर लेती हैं. जब बीमा कंपनियां बहुत बड़े दावे (जैसे प्राकृतिक आपदा या बड़ी दुर्घटना) के जोखिम को कम करना चाहती हैं, तो वे अपनी पॉलिसियों का एक हिस्सा पुनर्बीमाकर्ता को हस्तांतरित कर देती हैं और इसके बदले प्रीमियम देती हैं.
लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में इसमें कमी आई है. भारत की सरकारी पुनर्बीमा कंपनी जीआईसी-री समेत कई संस्थानों ने या तो कवरेज कम किया है या प्रीमियम बढ़ाए हैं. ऐसे में यह राशि घरेलू पूल उद्योग के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच व्यापार को बाधित होने से बचाएगी.
महंगाई पर राहत का प्रयास
इसी के साथ सरकार ने महंगाई के दबाव को कम करने के लिए महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में 2 फीसदी की बढ़ोतरी की घोषणा की है, जो 1 जनवरी से लागू होगी. ये भत्ते कस्टमर प्राइस इंडेक्स यानी सीपीआई के आधार पर साल में दो बार संशोधित किए जाते हैं. हाल के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में महंगाई दर 3.40 फीसदी रही, जिसमें रसोई गैस जैसी वस्तुओं की कीमतों का असर दिखा.
भारत एक जटिल वैश्विक माहौल में दो मोर्चों पर एक साथ रणनीति बना रहा है. एक तरफ अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने की कोशिश, और दूसरी ओर घरेलू स्तर पर महंगाई के दबाव को कम करने का प्रयास. आने वाले समय में पता चलेगा कि यह समुद्री बीमा पूल कितना प्रभावशाली साबित होता है.