नयी दिल्ली,छह नवंबर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने एक नयी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत उच्च आय और धन की असमानता वाले शीर्ष देशों में शामिल है लेकिन 2015-16 और 2019-21 के बीच बहुआयामी गरीबी में रहने वाली आबादी का हिस्सा 25 से गिरकर 15 प्रतिशत रह गया है।
सोमवार को जारी ‘2024 एशिया-प्रशांत मानव विकास रिपोर्ट’ में दीर्घकालिक प्रगति की तस्वीर पेश पेश की गई है,साथ ही इसमें लगातार असमानता और व्यापक व्यवधान का भी जिक्र किया गया है और मानव विकास को बढ़ावा देने के लिए तत्काल नए दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई है।
भारत में 2000 और 2022 के बीच प्रति व्यक्ति आय 442 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2,389 अमेरिकी डॉलर हो गई। वहीं 2004 और 2019 के बीच गरीबी दर (प्रति दिन 2.15 अमेरिकी डॉलर के अंतरराष्ट्रीय गरीबी माप के आधार पर) 40 प्रतिशत से गिरकर 10 प्रतिशत रह गई।
इस नयी रिपोर्ट में कहा गया है कि अधूरी आकांक्षाएं, बढ़ती मानवीय असुरक्षा, और संभावित रूप से अधिक उथल-पुथला भरा भविष्य बदलाव की तात्कालिकता पैदा करती है।
इसमे कहा गया कि 2015-16 और 2019-21 के बीच बहुआयामी गरीबी में रहने वाली आबादी का हिस्सा 25 से गिरकर 15 प्रतिशत हो गया।
रिपोर्ट में कहा गया कि श्रमबल में महिलाओं का हिस्सा 23प्रतिशत है।
संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव और एशिया तथा प्रशांत के लिए यूएनडीपी के क्षेत्रीय निदेशक कान्नी विग्नाराजा ने कहा, ‘‘रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि मौजूदा चुनौतियों पर काबू पाने के लिए हमें मानव विकास में निवेश को प्राथमिकता देनी होगी।’’
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