देश की खबरें | भारत ने अफगानिस्तान संकट के समावेशी राजनीतिक समाधान की वकालत की

नयी दिल्ली, 24 नवंबर विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने अफगानिस्तान संकट का बातचीत के जरिये समावेशी राजनीतिक समाधान निकालने की जरूरत बताते हुए बुधवार को कहा कि भारत को यह देखना होगा कि अफगानिस्तान में कठिन परिस्थिति में अपने हितों की बेहतर ढंग से सुरक्षा करते हुए कैसे आगे बढ़ा जा सकता है।

विदेश सचिव ने कहा कि अफगानिस्तान की धरती का किसी दूसरे देश को नुकसान पहुंचाने के लिये इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए ।

उद्योग परिसंघ के सत्र को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने कहा कि अफगानिस्तान के मुद्दे पर भारत सभी संबद्ध पक्षों के साथ सम्पर्क में है ।

उन्होंने कहा कि तालिबान ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि भारत ने पिछले 20 वर्षो में अफगानिस्तान के विकास में काफी योगदान दिया है और वह चाहता है कि उसके देश को मानवीय सहायता प्रदान की जाए ।

श्रृंगला ने कहा कि भारत ने तालिबान के साथ दोहा और मास्को में सम्पर्क स्थापित किया है और तालिबान चाहता है कि भारत, अफगानिस्तान में फिर से दूतावास खोले ।

विदेश सचिव ने कहा कि अशरफ गनी सरकार के तेजी से गिरने और तालिबान द्वारा काबुल पर तेजी से कब्जा करने के कारण भारत उस देश में कुछ असहज स्थिति में पहुंच गया था क्योंकि वहां के घटनाक्रम ‘अप्रत्याशित’ थे ।

उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि एक कठिन परिस्थिति से अपने हितों की सुरक्षा करते हुए कैसे बेहतर ढंग से आगे बढ़ा जा सकता है।

विदेश सचिव ने कहा कि अफगानिस्तान की स्थिति को लेकर भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ ‘सक्रिय’ है और ‘सम्पर्क’ बनाये हुए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उसके वृहत हितों की सुरक्षा हो सके ।

उन्होंने कहा, ‘‘ हम इस मुद्दे पर सभी संबंधित देशों के साथ सम्पर्क में है और हम देखेंगे कि इस कठिन परिस्थिति में अपने हितों की बेहतर ढंग से सुरक्षा करते हुए कैसे आगे बढ़ा जा सकता है।’’

विदेश सचिव ने अफगानिस्तान के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2593 का जिक्र करते हुए इसे लाभकारी बताया ।

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में मानवीय पहुंच प्रदान करने की जरूरत है तथा वहां महिलाओं, बच्चों एवं अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के संबंध में बातचीत के जरिये समावेशी राजनीतिक समाधान निकाला जाए, उसकी धरती का किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिये इस्तेमान न हो, वहां मानवीय आधार पर पहुंच सुगम बनायी जाए।

श्रृंगला ने कहा कि ये बुनियादी मानदंड है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को देखना होगा कि अफगानिस्तान की वर्तमान सत्ता इस पर जवाबदेह हो। उन्होंने कहा कि हमें देखना और इंतजार करना होगा ।

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