देश की खबरें | प्रभारी मंत्री ने बीएमसी मुख्यालय में कार्यालय बनाकर गलत मिसाल पेश की : विपक्ष
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र में मुंबई के उपनगरों के प्रभारी मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय में कार्यालय स्थापित किया है जिसपर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और शिवसेना (यूबीटी) ने आपत्ति जताई है।
मुंबई, 21 जुलाई महाराष्ट्र में मुंबई के उपनगरों के प्रभारी मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय में कार्यालय स्थापित किया है जिसपर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और शिवसेना (यूबीटी) ने आपत्ति जताई है।
दोनों दलों ने कहा है कि लोढ़ा के कदम ने एक ‘‘गलत मिसाल’’ पेश की है और यह नगर निकाय के अधिकारों के अतिक्रमण का कृत्य है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता जयंत पाटिल ने महाराष्ट्र विधानसभा में यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुंबई उपनगरों के प्रभारी मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने बीएमसी के एक केबिन में अपना कार्यालय बनाया है।
पाटिल ने कहा, ‘‘मैं इस शहर का प्रभारी मंत्री था और बीएमसी में कार्यालय खोलना उसके अधिकारों का अतिक्रमण है। बीएमसी में कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है और सरकार को उसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्वशासित निकायों से अधिक दूरी बनानी होगी।’’
बीएमसी के चुनाव एक साल से अधिक समय से लंबित हैं।
राकांपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘बीएमसी आयुक्त को मंत्री के कार्यालय में सम्मन किया जा सकता है लेकिन कार्यालय बनाना गलत मिसाल है।’’
लोढ़ा के पास राज्य सरकार में कौशल विकास और उद्यमिता विभाग है। वह मुंबई उपनगरों के प्रभारी मंत्री भी हैं। महाराष्ट्र में हर जिले का अपना प्रभारी मंत्री होता है।
बीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि दक्षिण मुंबई में एक सदी पुरानी विरासत इमारत की पहली मंजिल पर लोढ़ा का कार्यालय स्थित है और उनके दफ्तर के दरवाजे पर उनकी नाम पट्टिका लगी है।
विधानसभा के बाहर बोलते हुए, लोढ़ा ने अपना बचाव किया और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर परोक्ष रूप से कटाक्ष किया। ठाकरे को कोरोना वायरस महामारी के दौरान मुख्यमंत्री रहते हुए ज्यादातर समय घर से काम करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था।
लोढ़ा ने कहा, “ हमारी सरकार लोगों के पास जाती है और काम करती है....पहले प्रभारी मंत्रियों के पास भी बीएमसी में केबिन होने चाहिए थे। हम बंगले से काम नहीं करते हैं या सोशल मीडिया के माध्यम से काम नहीं करते हैं। इसलिए हम बीएमसी दफ्तर में बैठकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे और समाधान निकालेंगे।”
राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि बाजार समिति और शिक्षा समिति के अध्यक्ष के केबिन दो प्रभारी मंत्रियों को दे दिए गए हैं।
ठाकरे ने लोढ़ा पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘इसके पीछे क्या वजह थी? क्या वे वहां टावर बनाना चाहते हैं?’’
दरअसल, लोढ़ा का परिवार निर्माण के कारोबार में शामिल है।
ठाकरे ने आरोप लगाया, ‘‘यह गलत उदाहरण है क्योंकि मंत्रियों और स्थानीय स्व-शासन के कर्तव्य अलग-अलग हैं। बीएमसी में अब कोई महापौर या जन प्रतिनिधि नहीं है। यह घोटाला करने के लिए किया गया है।’’
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने कहा कि अगर प्रभारी मंत्रियों को बीएमसी में केबिन दिए जाते हैं तो राज्य में सभी महापौरों को मंत्रालय (राज्य सचिवालय) में कार्यालय दिए जाने चाहिए और मुंबई के विधायकों को नगर निकाय मुख्यालय में कार्यालय दिए जाने चाहिए।
ठाकरे ने कहा, “ अगर यह 24 घंटे में नहीं रुका तो लोग अपना गुस्सा निकालेंगे और मुझे नहीं पता कि फिर किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।'’
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