जरुरी जानकारी | बिहार जैसे राज्य में बैंको को जमा के हिसाब से कर्ज का हिस्सा बढ़ाने की जरूरत: नीतीश

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पटना, 15 जून मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को कहा कि बिहार जैसे कम विकिसत राज्य के जमा पैसों को यहां के बैंक विकसित राज्यों में लगा देते हैं। उन्होंने बैंकों से बिहार में जमा के हिसाब से राज्य की इकाइयों को दिए जाने वाले कर्ज में सुधार की जरूरत पर बल दिया।

अधिवेशन भवन में आयोजित राज्य स्तरीय बैकर्स समिति की 72 वीं समीक्षा बैठक के उद्घाट्न सत्र में नीतीश ने कहा कि बिहार में बैंकों के प्रति बहुत अच्छी अवधारणा है, लोगों का इसके प्रति आकर्षण है। लोग अपनी बचत का अधिक से अधिक पैसा बैंकों में जमा करते हैं, जबकि बैंक हमारे राज्य के जमा पैसों को यहां के बैंक विकसित राज्यों में लगा देते हैं।

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उन्होंने बिहार में क्रेडिट-डिपाजिट रेशियो (ऋण:जमा अनुपात) बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि इसके लिये वार्षिक ऋण सहायता योजना के लक्ष्य को बढ़ाना पड़ेगा। इससे कर्ज का अनुपात बेहतर होगा।

नीतीश ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में बिहार के बैंकों के पास कुल जमा 3.71 लाख करोड़ रूपये रहा जबकि कर्ज इसका 43.03 प्रतिशत ही रहा।

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उन्होंने कहा कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योग इकाईयां, पशुपालन, मुर्गीपालन, हस्तशिल्प, हस्तकरघा, कृषि एवं सबंद्ध क्षेत्र के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी बिहार में रोजगार सृजन की काफी संभावनाएं है। नीतीश ने कहा कि बैंक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग क्षेत्रों को ज्यादा से ज्यादा मदद करें। इस क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुये लक्ष्य को बढ़ाया जाय।

उन्होंने कहा कि लगभग 9.5 लाख जीविका समूहों का गठन किया जा चुका है। हमारा लक्ष्य 10 लाख जीविका समूहों के गठन का है। जीविका से जुड़ी गांव की महिलायें बैंकों की कार्यप्रणाली एवं शब्दावली को पढ़े लिखे लोगों से भी बेहतर ढंग से समझती हैं। जीविका समूह को एक से पांच लाख रूपये तक के ऋण किस्तों में दिए जाते हैं। इसे बढ़ाकर 3 से 10 लाख रुपए करने की आवश्यकता है।

नीतीश ने कहा कि राज्य के सभी लोगों का बैंक अकाउंट खोला जाए, इसके लिए विशेष ध्यान दिया जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य के 8,386 ग्राम पंचायतों में बैंक शाखा खोलने की आवश्यकता है। बिहार में 16 हजार की जनसंख्या पर तथा देश में 11 हजार की जनसंख्या पर बैंक की शाखाएं हैं।

नीतीश ने कहा कि बिहार के हर ग्राम पंचायत में बैंक की शाखा खोली जाय, इसमें सरकार बैंकों को पूरी सहायता करेगी।

उन्होंने कहा कि नई बैंक शाखा खोलने के लिये पंचायत सरकार भवनों के साथ-साथ अन्य सरकारी भवनों में जगह उपलब्ध करायी जायेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि उत्पादन और उत्पादकता दोनों बढ़ी है। कृषि विभाग ने किसान क्रेडिट कार्ड निर्गत करने के लिए 3.70 लाख आवेदन बैकों को अग्रसारित किये हैं जबकि बैंकों द्वारा अब तक केवल 50 हजार आवेदनों को ही स्वीकृत किया गया है, इन्हें शीघ्र स्वीकृत करें तथा किसान क्रेडिट कार्ड की संख्या बढ़ायें।

समीक्षा बैठक को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक देवेश लाल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य महाप्रबंधक महेश गोयल ने भी संबोधित किया।

बैठक में कृषि सह पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री प्रेम कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश शर्मा, उद्योग मंत्री श्याम रजक, सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह, मुख्य सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह, वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस0 सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी एवं अन्य बैंकों के वरीय अधिकारीगण उपस्थित थे ।

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