जरुरी जानकारी | सीपीओ, सोयाबीन डीगम और सोयाबीन तिलहन में सुधार, बाकी तेल तिलहन पूर्वस्तर पर
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशों में सुधार के रुख के बीच दिल्ली बाजार में सोमवार को कच्चा पामतेल (सीपीओ), सोयाबीन तिलहन, सोयाबीन डीगम तेल कीमतों में तेजी देखने को मिली जबकि सरसों एवं मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन दिल्ली एवं इंदौर तेल, पामोलीन और बिनौला तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बंद हुई।
नयी दिल्ली, 21 अगस्त विदेशों में सुधार के रुख के बीच दिल्ली बाजार में सोमवार को कच्चा पामतेल (सीपीओ), सोयाबीन तिलहन, सोयाबीन डीगम तेल कीमतों में तेजी देखने को मिली जबकि सरसों एवं मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन दिल्ली एवं इंदौर तेल, पामोलीन और बिनौला तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बंद हुई।
बाजार सूत्रों ने कहा कि सामान्य कारोबार के बीच नीचे भाव में देश के किसानों के बिकवाली नहीं करने तथा शिकागो एक्सचेंज के मजबूत रहने से सोयाबीन तिलहन में मामूली सुधार तथा सोयाबीन डीगम तेल कीमतें मजबूत हैं। देश की मंडियों में सस्ते आयातित खाद्यतेलों के भरमार के बीच देशी तेल तिलहनों की कम कारोबारी पूछताछ के कारण सरसों एवं मूंगफली तेल तिलहन, सोयाबीन दिल्ली एवं सोयाबीन इंदौर तेल कीमतें पूर्वस्तर पर बनी रहीं। मलेशिया एक्सचेंज के मजबूत होने से सीपीओ में भी सुधार रहा।
सूत्रों ने कहा कि मलेशिया का खाद्यतेल निर्यात काफी बढ़ रहा है क्योंकि भारत का खाद्यतेल आयात इन दिनों काफी बढ़ा है जो दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। देश अपनी खाद्यतेल जरुरतों के लिए लगभग 55-60 प्रतिशत तक आयात पर निर्भर है और सस्ते आयातित तेलों की भरमार होने के कारण देशी तिलहन पेराई मिलों का काम लगभग ठप पड़ गया है।
उन्होंने कहा कि व्यापार के तरीके के संदर्भ में एक अजीब बात देखने को मिल रही है कि जिस लागत से आयातक खाद्यतेलों का आयात कर रहे हैं, उस लागत से चार से छह रुपये किलो कम दाम पर बंदरगाहों पर आयात किये गये सीपीओ, सोयाबीन डीगम और सूरजमुखी तेल को बेचा जा रहा है। यह जो नुकसान हो रहा है वह अंतत: बैंकों को ना भुगतना पड़ जाये, इसकी चिंता की जानी चाहिये।
खाद्यतेल आयात के लिए अधिकतर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्ज उपलब्ध कराते हैं। दूसरी बात, बैंक, कर्ज के भुगतान के लिए कम से कम 90 दिन का समय देते हैं जिसे बढ़ाकर 360 दिन तक किया जा सकता है। ऐसे में सस्ते में आयातित खाद्यतेल को जल्दबाजी में बेचने की कौन सी मजबूरी है ?
सूत्रों ने कहा कि अगर नुकसान में ही खाद्यतेल बिकता रहा तो बैंकों के कर्ज डूबने का खतरा हो सकता है जो आम जनता का ही धन है।
उन्होंने कहा कि इन सब स्थितियों के बावजूद सवाल यह है कि सस्ते आयात के भरमार के बावजूद उपभोक्ताओं को खुदरा में खाद्यतेल सस्ता क्यों नहीं मिल रहा ? तेल संगठनों को इस चिंता को सरकार के सामने विवरण के साथ रखना चाहिये। खाद्यतेलों के थोक दाम सस्ता होने के बावजूद खुदरा में सस्ता खाद्यतेल नहीं उपलब्ध होने के क्या कारण है?
सूत्रों ने कहा कि क्या इसकी वजह खाद्यतेल पैकर कंपिनयों द्वारा अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) सीमा से अधिक तय किया जाना है या कोई अन्य कारण है, इसकी छानबीन कर उपयुक्त कदम उठाया जाना चाहिये नहीं तो सस्ते आयात की पूरी कवायद बेमतलब हो जायेगी।
सोमवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,685-5,735 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 7,865-7,915 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,850 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,735-3,020 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,800 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,790 -1,885 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,790 -1,900 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,200 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,625 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,250 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,300 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,450 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,525 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,100-5,195 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,865-4,960 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।
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