जरुरी जानकारी | आयातित खाद्य तेल कीमतों में गिरावट, देशी तेल तिलहन पूर्व स्तर पर
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशों में तेजी के रुख तथा माल की कमी और मांग होने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को मूंगफली तेल तिलहन कीमतों में सुधार रहा। वहीं अत्यधिक आयात होने तथा बंदरगाहों पर आयात लागत के मुकाबले इसी तेल को लगभग सात रुपये लीटर सस्ते में बिकवाली करने से सोयाबीन डीगम तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन कांडला तेल कीमतों में गिरावट रही।
नयी दिल्ली, नौ अगस्त विदेशों में तेजी के रुख तथा माल की कमी और मांग होने के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को मूंगफली तेल तिलहन कीमतों में सुधार रहा। वहीं अत्यधिक आयात होने तथा बंदरगाहों पर आयात लागत के मुकाबले इसी तेल को लगभग सात रुपये लीटर सस्ते में बिकवाली करने से सोयाबीन डीगम तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन कांडला तेल कीमतों में गिरावट रही।
जबकि किसानों के कम कीमत पर बिकवाली करने से बचने और अच्छे फसल की कमी के बीच सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन दिल्ली एवं इंदौर तेल, बिनौला जैसे देशी तेल तिलहन के साथ पामोलीन दिल्ली तेल के भाव पूर्व स्तर पर बने रहे।
शिकॉगो एक्सचेंज और मलेशिया एक्सचेंज में सुधार चल रहा है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि अमेरिका और ब्राजील में प्रति हेक्टेयर तिलहन की उत्पादकता कम रहने की आशंका से वहां सितंबर से अक्टूबर के खाद्यतेलों के सौदों के दाम 20 डॉलर महंगा कर दिया गया है। इसी वजह से अमेरिका और मलेशिया में सुधार है।
सूत्रों ने कहा कि दूसरी ओर बैंकों का ऋण साखपत्र (एलसी) चलाते रहने की मजबूरी की वजह से आज हरियाणा में कांडला पोर्ट से आयातित सूरजमुखी तेल को शुल्क समेत 77.50 रुपये लीटर के भाव थोक में बेचा गया है। जबकि इस तेल का आयात भाव बैठता है- 84-84.50 रुपये लीटर। यानी आयात भाव के मुकाबले लगभग सात रुपये नीचे भाव पर इस खाद्यतेल को बेचा गया तब हरियाणा और पंजाब के किसानों की अधिक लागत वाली सूरजमुखी पैदावार धरी की धरी रहेगी।
अब इस कम कीमत के लिहाज से इस सूरजमुखी तेल का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) 105-110 रुपये लीटर होना चाहिये लेकिन उपभोक्ताओं को यह तेल 130-140 रुपये लीटर मिल रहा है। इस सस्ती के बावजूद ना तो उपभोक्ता, ना ही बैंक को फायदा है। जिस नुकसान के साथ आयातित खाद्यतेलों को बेचा जा रहा है अंतत: उस नुकसान की भरपाई कौन करेगा ? तेल उद्योग पेराई की कमी की स्थिति से जूझ रहा है तथा पशु आहर के उपयोग में आने वाले खल की कमी अलग से हो रही है जिससे दूध और महंगा होने का खतरा हो सकता है।
सूत्रों ने कहा कि अभी जो अधिक आयात हो रहा है वह आगे परेशानी खड़ा करेगा और ‘सॉफ्ट आयल’ (नरम तेल) का आयात आने वाले दिनों में प्रभावित हो सकता है। इसकी वजह है आयातकों द्वारा अपने ‘एलसी’ को चलाते रहने के मकसद से सूरजमुखी और सोयाबीन तेल को बंदरगाहों पर नीचे भाव पर बेचने की मजबूरी।
इसके मुकाबले पामोलीन तेल का आयात करने में जो पहले मामूली नुकसान हो रहा था वह नुकसान आज के हिसाब से बिल्कुल नहीं है। ऐसे में आयातक नरम तेलों को महंगा खरीद कर सस्ते में बेचने की जगह पामोलीन आयात करने को तवज्जो देंगे जिसमें कोई नुकसान नहीं रह गया है।
बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,750-5,800 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 7,865-7,915 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 18,850 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,735-3,020 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,900 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,805 -1,900 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,805 -1,915 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,250 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,000 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,550 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,300 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,400 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,050-5,145 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,815-4,910 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,015 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 09, 2023 10:26 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

