ताजा खबरें | नए आपराधिक कानूनों में दुष्कर्म पीड़िताओं की गरिमा की रक्षा के लिए अहम प्रावधान : सरकार
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने बुधवार को कहा कि नए आपराधिक कानूनों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने तथा दुष्कर्म पीड़िताओं की गरिमा की रक्षा के लिए कई अहम प्रावधान किए गए हैं।
नयी दिल्ली, 23 जुलाई गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने बुधवार को कहा कि नए आपराधिक कानूनों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने तथा दुष्कर्म पीड़िताओं की गरिमा की रक्षा के लिए कई अहम प्रावधान किए गए हैं।
राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने बताया कि नए कानूनों के तहत मामलों के शीघ्र और निष्पक्ष निपटारे को प्राथमिकता दी गई है, जिससे आमजन का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बढ़ेगा।
उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी के लिए किए गए मुख्य प्रावधानों के तहत प्रारंभिक जांच 14 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी और अग्रिम जांच के लिए 90 दिन की समय सीमा तय की गई है।
कुमार ने बताया कि पीड़ित और अभियुक्त को दस्तावेजों की आपूर्ति 14 दिनों के भीतर करनी होगी तथा बरी करने संबंधी आवेदन 60 दिनों के भीतर और आरोप तय करने की प्रक्रिया भी 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।
उन्होंने बताया कि निर्णय सुनाने की समय सीमा 45 दिन नियत है और राज्यपाल के समक्ष 30 दिन पूर्व और राष्ट्रपति के समक्ष 60 दिन पूर्व दया याचिकाएं दाखिल करना होगा।
मंत्री ने बताया कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों की जांच को दो महीने के भीतर पूरा करने का प्रावधान किया गया है तथा मामलों में अनावश्यक देरी रोकने के लिए सुनवाई में अधिकतम दो स्थगन की अनुमति दी गई है।
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि नए कानूनों में दुष्कर्म पीड़िताओं की गरिमा बनाए रखने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इनके तहत दुष्कर्म पीड़िता का बयान ऑडियो-वीडियो माध्यम से दर्ज किया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
उन्होंने कहा कि पीड़िता का बयान यथासंभव महिला मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाएगा और यदि महिला मजिस्ट्रेट उपलब्ध न हो, तो पुरुष मजिस्ट्रेट द्वारा महिला की उपस्थिति में दर्ज किया जाएगा।
कुमार के अनुसार, पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट सात दिनों के भीतर जांच अधिकारी को सौंपना अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने बताया कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों की पीड़िताओं को नि:शुल्क प्राथमिक उपचार और चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराना सभी अस्पतालों के लिए अनिवार्य किया गया है।
मंत्री ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के लिए मृत्युदंड तक की कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 23, 2025 02:52 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

