जरुरी जानकारी | कम गुणवत्ता वाले तांबा कतरन के आयात से प्रभावित होती है अंतिम उत्पादों की गुणवत्ता
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. खनन उद्योग संगठन फिमी ने कहा है कि कम गुणवत्ता वाले तांबे के कतरनों (स्क्रैप) का कम कीमत पर आयात करने से अंतिम उत्पादों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस महत्वपूर्ण धातु का इस्तेमाल, आवास सहित कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है।
नयी दिल्ली, दो फरवरी खनन उद्योग संगठन फिमी ने कहा है कि कम गुणवत्ता वाले तांबे के कतरनों (स्क्रैप) का कम कीमत पर आयात करने से अंतिम उत्पादों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस महत्वपूर्ण धातु का इस्तेमाल, आवास सहित कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को अपने बजट भाषण में घोषणा की थी कि तांबे के कतरन पर 2.5 प्रतिशत की रियायती मूल सीमा शुल्क को मुख्य रूप से द्वितीयक तांबा उत्पादकों को कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जारी रखा जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं।
फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (फिमी) ने कहा, ‘‘कम कीमत पर कम गुणवत्ता वाले तांबे के ‘स्क्रैप’ के आयात का अंतिम उत्पादों की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिनका उपयोग आवास, तार और कॉइल में किया जाता हैं इनकी कम चालकता और ऐसे ‘स्क्रैप’ के उच्च प्रतिरोध के कारण आग लगने का खतरा रहता है।’’
फिमी के अनुसार उसका मानना है कि निम्न गुणवत्ता वाले तांबे के आयात को प्रतिबंधित करने के लिए एक प्रभावी नियामक निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।
संगठन ने कम गुणवत्ता वाले तांबा स्क्रैप के आयात को हतोत्साहित करने के लिए मूल सीमा शुल्क को 2.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत करने का अनुरोध किया था और धातु स्क्रैप का आयात करने वाले बंदरगाहों पर कड़े सीमा शुल्क और भौतिक निरीक्षण की मांग की थी।
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