देश की खबरें | अधिक समय तक रह सकती है टी-कोशिका-आधारित टीके से मिली प्रतिरक्षा: अध्ययन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शोधकर्ताओं ने टी-कोशिकाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक कृत्रिम बुद्धिमता से तैयार टीके की प्रभावशीलता का प्रदर्शन किया है।

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल शोधकर्ताओं ने टी-कोशिकाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक कृत्रिम बुद्धिमता से तैयार टीके की प्रभावशीलता का प्रदर्शन किया है।

अमेरिका में स्थित पेंसिल्वेनिया स्टेट विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा कि इस तरह का टीका भविष्य में उभरने वाले स्वरूपों के खिलाफ लंबे समय तक प्रतिरक्षा प्रदान कर सकता है और इसे फ्लू जैसी अन्य मौसमी वायरल बीमारियों के लिए एक ‘मॉडल’ के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सार्स-सीओवी-2 स्पाइक प्रोटीन के प्रति एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए तैयार किये मौजूदा कोविड-19 टीके ‘म्यूटेशन’ के प्रति संवेदनशील थे जो समय के साथ टीके को कम प्रभावी बना सकते थे।

जब किसी जीन के डीएनए में कोई स्थाई परिवर्तन होता है तो उसे उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) कहा जाता है।

उन्होंने अध्ययन पर डेनमार्क स्थित एक बायोटेक्नोलॉजी फर्म ‘एवैक्सियन बायोटेक’ के साथ भागीदारी की, जो ‘फ्रंटियर्स इन इम्यूनोलॉजी’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि टी-कोशिका (सेल) आधारित टीका जिन चूहों को लगाया गया उनमें से 87.5 प्रतिशत बच गये। बचे हुए सभी चूहों को 14 दिनों के भीतर संक्रमण से मुक्त पाया गया।

पेन स्टेट में पशु एवं जैव चिकित्सा विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर गिरीश किरीमंजेश्वर ने कहा, ‘‘हमारा टीका चूहों में गंभीर कोविड-19 को रोकने में बेहद प्रभावी था, और इसे मनुष्यों में भी इसका परीक्षण शुरू करने के लिए आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।’’

किरीमंजेश्वर के अनुसार, सार्स-सीओवी-2 वायरस के स्पाइक प्रोटीन से उत्परिवर्तन हो सकता है।

उन्होंने कहा कि एंटीबॉडी-आधारित टीके की तुलना में टी-कोशिका-आधारित टीके का निर्माण करना कठिन और अधिक समय लेने वाला है।

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