देश की खबरें | आईएमए ने मांडविया को पत्र लिखकर जेनेरिक दवाओं पर एनएमसी के नियमों को वापस लेने की मांग की

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नयी दिल्ली, 22 अगस्त भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को पत्र लिखकर सभी दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित होने तक नुस्खों में जेनेरिक दवाएं अनिवार्य रूप से लिखने पर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के नियमों को वापस लेने की मांग की है।

आईएमए ने उन नियमों पर भी चिंता व्यक्त की जो डॉक्टरों को फार्मा कंपनियों द्वारा प्रायोजित सम्मेलनों में भाग लेने से रोकते हैं। उसने कहा कि इस तरह के निषेध पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उसने मांग की कि संघों और संगठनों को एनएमसी नियमों के दायरे से छूट दी जानी चाहिए।

आईएमए और इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस के सदस्यों ने सोमवार को मांडविया से मुलाकात की और एनएमसी के नियमों पर अपनी चिंता व्यक्त की।

एनएमसी ने अपने 'पंजीकृत चिकित्सकों के व्यावसायिक आचरण से संबंधित विनियमों' में कहा है कि सभी डॉक्टरों को जेनेरिक दवाएं लिखनी होंगी, ऐसा न करने पर उन्हें दंडित किया जाएगा और उनका लाइसेंस भी एक अवधि के लिए निलंबित किया जा सकता है।

इसमें चिकित्सकों से ब्रांडेड जेनेरिक दवाएं लिखने से बचने को भी कहा गया है।

एनएमसी के नियमों में यह भी कहा गया है, ‘‘पंजीकृत चिकित्सकों और उनके परिवारों को कोई उपहार, यात्रा सुविधाएं, नकदी या आर्थिक सहायता नहीं मिलनी चाहिए। किसी भी बहाने से उनकी पहुंच फार्मास्युटिकल कंपनियों या उनके प्रतिनिधियों, वाणिज्यिक स्वास्थ्य देखभाल प्रतिष्ठानों, चिकित्सा उपकरण कंपनियों या कॉर्पोरेट अस्पतालों की ओर से प्रदान किये जाने वाले मनोरंजन तक नहीं होनी चाहिए।’’

आईएमए ने कहा है कि नैतिक आचरण और पक्षपात रहित प्रशिक्षण माहौल सुनिश्चित करने की मंशा वाजिब है, लेकिन फार्मास्युटिकल कंपनियों या स्वास्थ्य तंत्र द्वारा प्रायोजित तृतीय पक्षीय शिक्षण गतिविधियों पर सीधे-सीधे पाबंदी पर पुनर्विचार होना चाहिए।

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